मोरगांव अर्जुनी तालुका में किसानों के रुझान में बदलाव देखा जा रहा है। पारंपरिक फसलों की बजाय किसान अब मिर्ची की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। तालुका के एक किसान ने अपने एक एकड़ खेत में मिर्ची की खेती कर अच्छे परिणाम प्राप्त किए हैं।
किसान ने बताया कि मिर्ची की खेती में कम खर्च और अधिक उत्पादन होने के कारण यह उनके लिए अधिक लाभकारी साबित हुई है। इस फसल से उन्हें प्रति वर्ष लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि यह फसल न केवल लाभकारी है बल्कि इसकी मांग भी बाजार में अच्छी है।
किसान ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यदि अन्य किसान भी मिर्ची की खेती अपनाएं तो उन्हें आर्थिक लाभ मिलेगा। उन्होंने कृषि में नवाचार और नई तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं और कृषि संबंधी सहायता का सही उपयोग कर मिर्ची की खेती को और बढ़ावा दिया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लाभकारी फसलें जैसे मिर्ची अपनाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी। तालुका में मिर्ची की सफलता से अन्य किसानों में भी नई फसल अपनाने की प्रेरणा मिल रही है।









