नई दिल्ली। गृह मंत्रालय की ओर से देशभर में नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त किए जाने की घोषित समयसीमा में महज तीन दिन शेष हैं। 31 मार्च तक नक्सल मुक्त भारत का लक्ष्य रखा गया है। हाल के महीनों में नक्सलियों के ज्यादातर शीर्ष नेता मारे गए या आत्मसमर्पण किया है। सूत्रों के मुताबिक 100 से 150 नक्सली छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और तेलंगाना में छिपे हैं।
अगले 48 घंटों में नक्सलवाद पर आखिरी प्रहार के लिए बड़े सर्च ऑपरेशन होंगे। इसमें विभिन्न कोबरा कमांडो, केंद्रीय बलों और राज्यों की पुलिस के 50 हजार जवान शामिल हैं। केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारियों को उम्मीद है कि तय समय तक बचे-खुचे नक्सली आत्मसमर्पण के लिए आगे आएंगे।
कोबरा कमांडो की भूमिका
कमांडो बटालियन फॉर रिजोल्यूट एक्शन यानी कोबरा की नक्सलियों का खात्मा करने में सबसे अहम भूमिका रही है। जंगल युद्ध में ये कमांडो यूएस मरीन कमांडो को टक्कर देते हैं। इनका गठन भी यूएस मरीन कमांडो फोर्स की तर्ज पर हुआ था। यूएस मरीन कमांडो बिना किसी मदद के जंगल में लगातार तीन रातों तक लड़ सकते हैं। कोबरा कमांडो पहली बार 2015 में गणतंत्र दिवस परेड में राष्ट्र के सामने आए थे।









