नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ पुलिस को नारायणपुर जिले में कथित फर्जी मुठभेड़ में मारे गए शीर्ष माओवादी कमांडर काटा रामचंद्र रेड्डी के शव को संरक्षित रखने का आदेश शुक्रवार को दिया। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एजी मसीह की पीठ ने कहा कि जब तक उच्च न्यायालय फर्जी मुठभेड़ और यातना के आरोप वाली याचिका पर निर्णय नहीं लेता, शव का दफन या दाह संस्कार नहीं किया जाएगा।
याचिकाकर्ता राजा चंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में यह अनुरोध किया कि मुठभेड़ की जांच स्वतंत्र एजेंसी द्वारा कराई जाए, जिसमें छत्तीसगढ़ के अधिकारी शामिल न हों। पीठ ने निर्देश दिया कि दुर्गा पूजा की छुट्टियों के बाद हाईकोर्ट याचिका पर पुनः विचार करे।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मुठभेड़ में दो माओवादी मारे गए, और राजा चंद्र के पिता पर सात राज्यों ने 7 करोड़ रुपये का इनाम रखा था। मारे गए एक अन्य माओवादी का शव परिवार को दे दिया गया और उसका अंतिम संस्कार हो चुका है, जबकि रामचंद्र रेड्डी का शव अभी अस्पताल में है।
याचिकाकर्ता के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्विस ने दलील दी कि उनके पिता को कथित रूप से प्रताड़ित किया गया और फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई, साथ ही पुलिस शव को ठिकाने लगाने की कोशिश कर रही थी। पीठ ने कहा कि सभी दलीलों को खुला रखा गया है और मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी जा रही।
जानकारी के अनुसार, 22 सितंबर को अबूझमाड़ के जंगलों में पुलिस ने दो शीर्ष माओवादी नेताओं को मुठभेड़ में मारने का दावा किया। उन्हें कडारी सत्यनारायण रेड्डी और काटा रामचंद्र रेड्डी के रूप में पहचाना गया। डीकेएसजेडसी ने आरोप लगाया कि उन्हें जंगल में निहत्था उठाकर योजना बनाकर मार दिया गया, ताकि इसे मुठभेड़ का रूप दिया जा सके।
काटा रामचंद्र रेड्डी का परिचय:
तेलंगाना के करीमनगर जिले के तीगलाकुंटापल्ली में जन्मे रामचंद्र रेड्डी ने 19 साल की उम्र में शिक्षक के रूप में करियर शुरू किया। बाद में उन्होंने महाराष्ट्र के नांदेड़ से वकालत की पढ़ाई की और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में वकील के रूप में काम किया। 2008 में भूमिगत होने के बाद वे ‘गुडसा उसेंडी’ और ‘विकल्प’ के नाम से दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रवक्ता बने। 2019 में कमेटी सचिव रावुला श्रीनिवास की मौत के बाद उन्होंने सचिव पद संभाला। उनके परिवार में पत्नी शांतिप्रिया, बेटी स्नेहा और पुत्र राजा चंद्र हैं।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश यह सुनिश्चित करता है कि कथा रामचंद्र रेड्डी के शव को सुरक्षित रखा जाए और स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच हो, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।









