नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के एक निजी संस्थान में 17 छात्राओं का यौन शोषण करने के आरोपी स्वयंभू धर्मगुरु चैतन्यानंद सरस्वती को रविवार तड़के उत्तर प्रदेश के आगरा से गिरफ्तार कर लिया गया। दिल्ली पुलिस की एक टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर सरस्वती (62) को ताजगंज इलाके के एक होटल से पकड़ा, जहां वह छिपकर ठहरा हुआ था।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सरस्वती के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने के बाद वह चार अगस्त को दिल्ली से फरार हो गया था। उसे पकड़ने के लिए कई टीम बनाई गई थीं और रविवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे उसे होटल के कमरे से गिरफ्तार कर दिल्ली लाया गया। गिरफ्तार के समय उसके पास से कुछ फर्जी विजिटिंग कार्ड और यूएन व ब्रिक्स से जुड़े दस्तावेज भी बरामद हुए।
FIR में चौंकाने वाले खुलासे
प्राथमिकी में कहा गया है कि सरस्वती कथित तौर पर छात्राओं को देर रात अपने आवास में आने के लिए मजबूर करता था और उन्हें अश्लील संदेश भेजता था। वह अपने फोन के जरिए उनकी गतिविधियों पर नजर रखता था। जांच में यह भी सामने आया कि उसने अलग-अलग नामों और विवरणों का इस्तेमाल करके कई बैंक खाते खोले और 50 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाल ली।
फर्जी पहचान और करोड़ों की धोखाधड़ी
पुलिस ने उसके 18 बैंक खातों और 28 फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा 8 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति फ्रीज कर दी है। उसके खिलाफ 122 करोड़ रूपये की धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज किया गया है। इसके अलावा, उसने फर्जी पासपोर्ट बनवाया और पीएमओ से संबंध होने का झूठा दावा किया। उसके पास यूएन और ब्रिक्स के विजिटिंग कार्ड भी मिले, जिनसे वह अपने आप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित दिखाने की कोशिश कर रहा था।
आगरा के होटल कर्मचारियों के अनुसार, सरस्वती ने 27 सितंबर को ‘पार्थ सारथी’ नाम से होटल में प्रवेश लिया और पूरे समय कमरे में ही रहा। गिरफ्तार के समय दिल्ली पुलिस ने उसकी पहचान की पुष्टि की और उसे पुलिस की 5 दिन की रिमांड में भेज दिया है।
पुलिस ने बताया कि यह गिरफ्तारी छात्राओं के यौन शोषण और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह मामला न केवल शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा की गंभीर चिंता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे फर्जी पहचान और दस्तावेज़ों का इस्तेमाल कर अपराधी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का झूठा दावा कर सकते हैं।












