नयी दिल्ली। भारत और चार देशों के यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (TEPA) बुधवार से लागू होगा। इस समझौते के तहत भारत को अगले 15 वर्षों में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता मिली है।
ईएफटीए में स्विजरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। समझौते पर 10 मार्च 2024 को हस्ताक्षर किए गए थे। इसके तहत स्विजरलैंड की घड़ियों, चॉकलेट, बिस्कुट और कटे एवं पॉलिश किए गए हीरों पर कम या शून्य शुल्क लागू होगा। घरेलू ग्राहकों को उच्च-गुणवत्ता वाले इन उत्पादों पर कम कीमतें उपलब्ध होंगी, क्योंकि भारत इन वस्तुओं पर सीमा शुल्क को 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से समाप्त करेगा।
समझौते के अनुसार ईएफटीए देशों ने भारत में 10 वर्षों में 50 अरब डॉलर और अगले पांच वर्षों में 50 अरब डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। इस निवेश से अनुमानित 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। यह भारत द्वारा अब तक किसी व्यापार समझौते में अपनी तरह की पहली निवेश प्रतिबद्धता है।
टीईपीए में यह प्रावधान भी है कि यदि प्रस्तावित निवेश किसी कारण से नहीं आता है, तो भारत चारों देशों को दी जाने वाली शुल्क रियायतों को पुनः संतुलित या निलंबित कर सकता है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि TEPA का उद्देश्य मुक्त व्यापार को बढ़ावा देना और आर्थिक भागीदारी को तेज करना है। गौरतलब है कि ईएफटीए देश यूरोपीय संघ (EU) का हिस्सा नहीं हैं और यह उन देशों के लिए विकल्प के रूप में स्थापित किया गया है जो यूरोपीय समुदाय में शामिल नहीं होना चाहते।
इसके अलावा, भारत 27 देशों के समूह EU के साथ भी व्यापक मुक्त व्यापार समझौते पर अलग से बातचीत कर रहा है।






