मुंबई| भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग की मशहूर अभिनेत्री और महान फिल्मकार वी. शांताराम की पत्नी संध्या शांताराम का 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
लंबे समय से वृद्धावस्था से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहीं संध्या ने शनिवार को अंतिम सांस ली। उनके निधन से न केवल मराठी बल्कि पूरे भारतीय फिल्म जगत में शोक की लहर है।
फडणवीस ने कहा – “संध्या जी की भूमिकाएं अमर रहेंगी”
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने लिखा —
“अभिनेत्री संध्या शांताराम के निधन की खबर बेहद दुखद है। ‘पिंजरा’ और ‘नवरंग’ जैसी फिल्मों में उनकी भूमिकाएं अविस्मरणीय रहीं। हिंदी सिनेमा में भी उन्होंने अपनी खास पहचान बनाई। ‘दो आंखें बारह हाथ’ में उनका अभिनय अद्भुत था — प्रभावशाली, गहराई लिए और कलात्मक।”
फडणवीस ने कहा कि संध्या जी का अभिनय और नृत्य दोनों ही सम्मोहक थे।
“उनके निधन से फिल्म जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। उनकी भूमिकाएं और उनका योगदान सदा याद रखा जाएगा।”
एकनाथ शिंदे और आशीष शेलार ने भी जताया दुख
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि संध्या शांताराम केवल एक अभिनेत्री नहीं थीं, बल्कि उन्होंने भारतीय सिनेमा की समृद्ध विरासत को नई पहचान दी।
“उनके जाने से सिनेमा ने अपने इतिहास का एक जीवंत अध्याय खो दिया है।”
राज्य के संस्कृति मंत्री आशीष शेलार ने भी संध्या जी के निधन पर शोक जताया और कहा —
“फिल्म ‘पिंजरा’ में उनकी भूमिका ने मराठी सिनेमा को नई ऊँचाई दी। उनका जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति है।”
1950-60 के दशक की लोकप्रिय अभिनेत्री
संध्या शांताराम भारतीय सिनेमा के उस दौर की प्रतीक थीं जब नृत्य, रंग और संवेदना का मेल फिल्मों की आत्मा होता था।
उन्होंने हिंदी और मराठी फिल्मों में यादगार किरदार निभाए —
- ‘दो आंखें बारह हाथ’ (1957)
- ‘झनक झनक पायल बाजे’ (1955)
- ‘नवरंग’ (1959)
- ‘पिंजरा’ (1972)
उनकी ये भूमिकाएँ आज भी भारतीय सिनेमा के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हैं।
सिनेमा की ‘नवरंग नायिका’ को श्रद्धांजलि
94 वर्षीय संध्या शांताराम ने पर्दे पर जितनी भावनाएं अपने अभिनय से जगाईं, उतनी ही प्रेरणा उन्होंने आने वाली पीढ़ियों को दी।
उनका जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक युगांत जैसा है —
एक ऐसी अभिनेत्री, जिसने “कला को पूजा और अभिनय को साधना” बना दिया।









