नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को तमिल फिल्म निर्देशक और राजनीतिक नेता सीमन के खिलाफ एक अभिनेत्री द्वारा 2011 में दर्ज कराए गए बलात्कार के मामले को दोनों पक्षों की सहमति के आधार पर रद्द कर दिया।
पीठ के सदस्यों न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन ने कहा कि अभिनेत्री ने सीमन के खिलाफ अपनी शिकायत वापस ले ली है। वहीं, सीमन ने भी हलफनामा दायर कर बिना शर्त माफी मांगी और अभिनेत्री के खिलाफ लगाए गए आरोप वापस लिए।
पीठ ने निर्णय सुनाते हुए कहा, “दोनों पक्ष किसी भी मुकदमे को जारी रखने का इरादा नहीं रखते हैं। प्रतिवादी ने डिजिटल और अन्य सभी माध्यमों, सोशल मीडिया सहित, पर अपीलकर्ता के खिलाफ कोई बयान नहीं देने पर भी सहमति व्यक्त की है। इसलिए यह न्याय के हित में होगा कि संबंधित आदेश को रद्द कर दिया जाए।”
शीर्ष अदालत ने इसके पहले दोनों पक्षों को एक-दूसरे से माफी मांगने का निर्देश भी दिया था। मामला मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली सीमन की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। उच्च न्यायालय ने पहले इस मामले को रद्द करने से इनकार किया और पुलिस को पूरी जांच कर अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
सीमन, जो तमिलर काची पार्टी के नेता भी हैं, पर तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत बलात्कार, आपराधिक धमकी, धोखाधड़ी और तमिलनाडु महिला उत्पीड़न निषेध अधिनियम की धारा 4 के तहत आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 2007 से 2011 के बीच वह सीमन के साथ व्यक्तिगत संबंध में थी और उन्होंने शादी का वादा किया था, लेकिन बाद में सीमन ने किसी अन्य से विवाह कर लिया। इस दौरान शिकायतकर्ता ने यौन शोषण और भावनात्मक शोषण का आरोप लगाया।
उच्चतम न्यायालय ने दोनों पक्षों की सहमति और आपसी समझौते के आधार पर मामले को रद्द कर दिया, जिससे यह मामला समाप्त हुआ।
यह घटना फिल्म उद्योग और राजनीति के ऐसे मामलों पर न्यायिक प्रक्रिया में सहमति आधारित समाधान के महत्व को रेखांकित करती है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार के कानूनी दावे को समाप्त करने के लिए दोनों पक्षों की सहमति और उचित हलफनामे की जरूरत होती है।









