नई दिल्ली। वर्ष 2024 में संभल के शाही जामा मस्जिद परिसर में अदालत-निर्देशित सर्वे के दौरान भड़की हिंसा के तीन आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जमानत दे दी। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने सभी आरोपियों को जेल से रिहा करने का आदेश सुनाया है। इन तीनों — दानिश, फैजान और नज़ीर — को दंगे के बाद गिरफ्तार किया गया था और तब से वे न्यायिक हिरासत में थे। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसे आज देश की सर्वोच्च अदालत ने पलट दिया।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकील सुलैमान मोहम्मद खान ने दलील दी कि पुलिस ने बिना पर्याप्त सबूतों के कठोर धाराओं में फंसाकर इन युवकों को जेल में डाल दिया है और ट्रायल शुरू होने की कोई स्पष्ट समयसीमा भी तय नहीं है। अदालत ने सभी परिस्थितियों और केस से जुड़े तथ्य देखते हुए माना कि इन आरोपियों को लंबी अवधि तक जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं बनता, इसलिए जमानत दी जाती है। शीर्ष अदालत के इस फैसले से आरोपियों के परिजनों में राहत और खुशी की लहर है।
यह हिंसक घटना 24 नवंबर 2024 को उस समय हुई थी, जब जिला प्रशासन और पुलिस बल मस्जिद स्थल के सर्वे के लिए पहुंचे थे। स्थानीय लोगों ने सर्वे का विरोध किया, जिसके बाद माहौल अचानक बिगड़ गया और पथराव व गोलीबारी की स्थिति बन गई। इस झड़प में चार लोगों की मौत हो गई थी और कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि इस दंगे की साजिश का मुख्य सूत्रधार शारिक साटा नाम का कथित चरमपंथी है, जो घटना से पहले ही देश छोड़कर विदेश फरार हो गया।
संभल के एसपी कृष्ण कुमार विष्णोई ने बताया कि शारिक साटा को पकड़ने के लिए यूपी पुलिस ने सीबीआई और इंटरपोल के साथ मिलकर अभियान तेज किया है और उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। पुलिस का दावा है कि साटा कई सालों से विदेश में छिपकर भारत-विरोधी गतिविधियों को आगे बढ़ा रहा है और संभल हिंसा की योजना भी उसी ने बनाई थी।
सुप्रीम कोर्ट के आज के आदेश के बाद औपचारिकताएँ पूरी होते ही दानिश, फैजान और नज़ीर की रिहाई की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। वहीं दंगे से जुड़े मुख्य आरोपी और अन्य फरार तत्वों की तलाश अब भी जारी है।









