देशभर में न्यायिक अधिकारियों के करियर की धीमी और असमान प्रगति पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि प्रारंभिक स्तर के न्यायिक अधिकारियों की वरिष्ठता तय करने के नियमों में राष्ट्रीय स्तर पर किसी न किसी रूप में एकरूपता जरूरी है।
सीनियरिटी विवाद खत्म करने के लिए राष्ट्रीय मानक की जरूरत
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि अलग-अलग राज्यों में अलग मानदंड सेवाओं में असंतुलन पैदा कर रहे हैं। कई अधिकारी दीवानी न्यायाधीश से शुरुआत करने के बावजूद अपने कार्यकाल में प्रधान जिला न्यायाधीश तक भी नहीं पहुंच पाते।
अदालत ने माना कि इससे युवा वकील न्यायिक सेवा में आने से हतोत्साहित हो रहे हैं, जो न्याय व्यवस्था के भविष्य के लिए चिंता का विषय है।
हाईकोर्ट के अधिकारों में दख़ल नहीं, बस सामान्य ढांचा चाहिए
पीठ ने स्पष्ट किया कि उसका इरादा उच्च न्यायालयों के अधिकारों को कमज़ोर करना नहीं है। नामों की सिफारिश और प्रशासनिक अधिकार हाईकोर्ट्स के पास ही रहेंगे।
न्यायालय का लक्ष्य केवल इतना है कि सीनियरिटी और पदोन्नति में न्यायसंगत और पारदर्शी प्रक्रिया देशभर में लागू हो।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की आपत्ति — “हर राज्य की स्थिति अलग”
इलाहाबाद हाईकोर्ट की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि एक ही नियम पूरे देश में लागू करना व्यावहारिक नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि हर राज्य की सेवा संरचना और न्यायिक जरूरतें अलग हैं। ऐसे में एक समान नियम नए विवाद खड़े कर देगा।
ACR प्रणाली पर सवाल — “सबको अच्छा, तो फिर मेरिट कहां?”
न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ भटनागर ने बताया कि अधिकांश राज्यों में वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) में सभी अधिकारियों को “अच्छा” या “बहुत अच्छा” रेटिंग दी जाती है।
ऐसे में वरिष्ठता ही असली फैक्टर बन जाती है और योग्यता की अनदेखी होती है। उन्होंने पदोन्नति में सीधी भर्ती और प्रमोशन को बराबर प्रतिनिधित्व देने का सुझाव भी दिया।
1989 से लंबित मसला, अब समाधान की उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कि यह मुद्दा पहली बार 1989 में अखिल भारतीय न्यायाधीश संघ द्वारा उठाया गया था। इतने वर्षों बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
अदालत ने संकेत दिए कि देशभर के न्यायिक अधिकारियों की तरक्की और वरिष्ठता के लिए एक पारदर्शी, समान और तर्कसंगत ढांचा तैयार किया जा सकता है।
जल्द आ सकता है बड़ा फैसला
सुनवाई अभी जारी है, लेकिन माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट जल्द ही ऐसा फैसला दे सकता है जिससे न्यायिक अधिकारीयों के करियर ग्रोथ में मौजूद असमानता दूर होगी और न्यायपालिका में योग्यता आधारित पदोन्नति को बढ़ावा मिलेगा।









