बुलढाणा जिले में इस वर्ष हुई अत्यधिक और लगातार बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खासतौर पर हल्दी की फसल को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। पारंपरिक रबी और गर्मी की फसलों में बढ़ती लागत और अनिश्चितता के चलते जिले के कई किसानों ने हल्दी की खेती को एक बेहतर विकल्प मानते हुए इसे अपनाया था। शुरुआत में फसल अच्छी नजर आ रही थी, लेकिन मौसम की मार ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
लगातार बारिश के कारण खेतों में लंबे समय तक नमी बनी रही और धूप की कमी भी रही। इसका सीधा असर हल्दी की जड़ों यानी गांठों पर पड़ा। नमी अधिक होने से गांठों के सड़ने की समस्या बढ़ गई, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई। आमतौर पर हल्दी की फसल को तैयार होने में करीब नौ महीने का समय लगता है, लेकिन इस बार खराब मौसम के कारण किसानों को मजबूरी में सात से आठ महीने में ही फसल की कटाई करनी पड़ी। इससे न केवल पैदावार कम हुई, बल्कि गुणवत्ता पर भी असर पड़ा।
फिलहाल बाजार में हल्दी को 14 हजार से 18 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक भाव मिल रहा है। हालांकि, भाव ठीक होने के बावजूद उत्पादन में आई भारी कमी के चलते किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई किसानों का कहना है कि लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। बीज, खाद, दवाइयों और मजदूरी पर किया गया खर्च बारिश की वजह से डूबता नजर आ रहा है।
इस स्थिति से किसान काफी निराश हैं। उनका कहना है कि यदि आने वाले वर्षों में भी मौसम की यही अनिश्चितता बनी रही, तो वे हल्दी की खेती से दूरी बना सकते हैं। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके। लगातार प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे किसान अब भविष्य को लेकर गंभीर चिंता में नजर आ रहे हैं।









