सोशल मीडिया ट्रायल पर उठे सवाल
नागपुर से एक 12 वर्षीय बच्चे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें बच्चे के हाथों को जंजीर से बांधकर ताला लगाया गया था। वीडियो सामने आते ही हड़कंप मच गया। मामले की जानकारी मिलते ही चाइल्ड हेल्पलाइन, महिला एवं बाल कल्याण विभाग की बाल संरक्षण टीम और अजनी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बच्चे को तुरंत मुक्त कराया और माता-पिता को पुलिस थाने बुलाया गया।
हालांकि, यह मामला सोशल मीडिया पर जितना दिखाया गया, सच्चाई उससे कहीं अलग निकली। बच्चे की मां ने सामने आकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। मां के अनुसार, उनका बेटा सामान्य नहीं है और बेहद कम उम्र में ही चोरी जैसी घटनाओं में शामिल हो रहा था। कभी मोबाइल तो कभी साइकिल चोरी करने की वजह से इलाके के लोग उनके घर आकर धमकियां देने लगे थे, यहां तक कि लाठियां लेकर मारने की चेतावनी भी दी जा रही थी।
इसी डर और तनाव के चलते मां ने पहले बच्चे को अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया। इलाज के बाद भी जब हालात नहीं सुधरे, तो बच्चे को घर से बाहर न जाए, किसी को नुकसान न पहुंचे और खुद सुरक्षित रहे—इसी उद्देश्य से केवल दो घंटे के लिए उसे जंजीर से बांधा गया था। मां का कहना है कि इसमें किसी प्रकार की क्रूरता या सजा का इरादा नहीं था।
लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो को अलग नजरिए से पेश किया गया, जिससे मामला तूल पकड़ गया। अब मां के बयान के बाद पूरे प्रकरण को नया मोड़ मिला है। प्रशासन और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। सच्चाई सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हर खबर कितनी सच होती है।






