महाराष्ट्र के इतिहास में पहली बार किसी आईएएस अधिकारी के खिलाफ शपथ पत्र के माध्यम से शिकायत दर्ज
लोकवाहिनी, विशेष:मुंबई। राज्य सरकार के जल संसाधन विभाग में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार है और यदि वरिष्ठ अधिकारी इसका समर्थन कर रहे हैं, तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि मंत्रालय से लेकर तहसील स्तर तक के अधिकारी भ्रष्टाचार में शामिल होंगे। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। छत्रपति संभाजीनगर निवासी रऊफ एन. पटेल ने सीधे तौर पर राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राज्य सरकार के मुख्य सचिव से 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर शपथ पत्र के साथ सेवानिवृत्ति से पहले विभागीय जांच कराने और मंत्रालय में मुख्य सचिव के पद पर बैठे अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने का अनुरोध किया है। दिए गए हलफनामे के मुताबिक संबंधित अधिकारी पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
रऊफ एन. पटेल ने दीपक कपूर से संबंधित अनियमित भ्रष्टाचार की जांच के संबंध में महाराष्ट्र के कई वरिष्ठों, मंत्रियों, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री को कई अनुरोध पत्र लिखे हैं, जिनमें उनसे कथित गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार की जांच करने की मांग की गई है। आवेदक का दावा है कि उन पत्रों पर कोई कार्रवाई किए बिना उन्हें रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया।
जल संसाधन विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों की वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से संबंधित फाइल को लंबे समय तक लंबित रखकर संगठित भ्रष्टाचार का समर्थन करने वाले अपर मुख्य सचिव दीपक कपूर की सेवानिवृत्ति से पहले विभागीय जांच की मांग रऊफ एन. पटेल ने की।
पटेल ने 3 दिसंबर 2025 को राज्यपाल को, 11 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को और 3 नवंबर 2025 को राज्य के मुख्य सचिव राजकुमार मीणा को पत्र लिखकर अनुरोध किया था। आरोप की गंभीरता को देखते हुए अब तक दीपक कपूर की जांच शुरू हो जानी चाहिए थी। लेकिन खास बात है कि अभी तक इनकी जांच शुरू नहीं हुई है।
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