बीड:मराठवाड़ा से एक बार फिर बेहद चिंताजनक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। वर्ष 2025 में मराठवाड़ा क्षेत्र में अब तक 1,129 किसानों ने आत्महत्या कर ली है। यह आंकड़ा न केवल डराने वाला है, बल्कि सरकार और प्रशासन की नीतियों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन आत्महत्याओं में सबसे ज्यादा 256 किसान अकेले बीड जिले से हैं, जिससे बीड एक बार फिर किसान आत्महत्याओं का केंद्र बन गया है।
यदि पिछले वर्ष की बात करें तो साल 2024 में मराठवाड़ा में 984 किसानों ने आत्महत्या की थी। लेकिन मात्र एक साल के भीतर इन मामलों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। लगातार दो वर्षों से बीड जिला किसान आत्महत्याओं के मामलों में सबसे आगे बना हुआ है, जो इस क्षेत्र में खेती की बदहाल स्थिति और किसानों की बढ़ती परेशानियों को उजागर करता है।
इस गंभीर स्थिति के विरोध में किसान आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं और संगठनों ने बीड कलेक्टर कार्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए किसानों को तत्काल राहत देने की मांग की। आंदोलनकारियों का आरोप है कि सरकार की किसान-विरोधी नीतियां, फसल नुकसान का उचित मुआवजा न मिलना, कर्ज का बढ़ता बोझ, सिंचाई सुविधाओं की कमी और लागत से कम दाम— यही किसान आत्महत्याओं के मुख्य कारण हैं।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि किसानों के कर्ज माफ किए जाएं, फसल बीमा योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए और आत्महत्या प्रभावित परिवारों को तुरंत आर्थिक सहायता दी जाए। किसानों का कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं।
मराठवाड़ा में बढ़ती किसान आत्महत्याएं सरकार के लिए एक बड़ी चेतावनी मानी जा रही हैं, जिस पर अब ठोस और संवेदनशील निर्णय की जरूरत है।









