लोकवाहिनी, संवाददाता मुंबई। ‘लाड़की बहन’ योजना के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया में एक त्रुटिपूर्ण प्रश्न के कारण महाराष्ट्र में 24 लाख से अधिक महिला लाभार्थी गलती से सरकारी कर्मचारी के रूप में वर्गीकृत हो गईं, जिससे उन्हें मासिक वित्तीय सहायता राशि का वितरण अचानक रुक गया। इस त्रुटि को महिला एवं बाल कल्याण विभाग (WCD) ने स्वीकार किया है और सरकार को प्रभावित लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन करने के लिए राज्य भर में लगभग एक लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को तैनात करना पड़ा है।
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को बताया कि ई-केवाईसी प्रपत्र (Form) में शामिल एक प्रश्न गलत तैयार हो गया था, जिसमें सरल प्रश्न की जगह दो नकारात्मक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। मराठी में प्रश्न था, ‘तुमच्या घरातील कोणी सरकारी नोकरीत नाही ना?’ (आपके परिवार में कोई सरकारी नौकरी में नहीं है, है न?)।
अधिकारियों ने बताया कि जिन लाभार्थियों को ‘नहीं’ में उत्तर देना चाहिए था, उन्होंने भ्रमित वाक्य संरचना होने के कारण ‘हाँ’ पर निशान लगा दिया। विभाग के अधिकारी ने कहा कि प्रश्न ने उत्तर देने वालों को भ्रमित किया और करीब 24 लाख लोगों ने ‘हाँ’ में उत्तर दे दिया। इससे स्वतः यह मान लिया गया कि परिवार का कम से कम एक सदस्य सरकारी कर्मचारी है और प्रणाली (System) ने मासिक भुगतान रोक दिया। अधिकारी ने बताया कि आंकड़ों की समीक्षा के दौरान त्रुटि का पैमाना स्पष्ट हुआ क्योंकि महाराष्ट्र में अर्धसरकारी निकायों और निगमों सहित मात्र आठ से नौ लाख सरकारी कर्मचारी हैं।









