यूपी में सवर्ण युवकों ने कराया मुंडन, बिहार में फांसी की मांग
लोकवाहिनी, संवाददाता नई दिल्ली/लखनऊ/पटना:देशभर में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर जनरल कैटेगरी के छात्रों और सवर्ण समाज का विरोध तेज होता जा रहा है। यूपी और बिहार समेत कई राज्यों में बुधवार को सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया गया। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति जता दी है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति रॉयमाल्य बागची की पीठ ने वकीलों की दलीलों को सुनते हुए कहा, “हमें पता है कि देश में क्या हो रहा है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि नियमों में यदि कोई खामियां हैं तो उन्हें दूर किया जाए। हम मामले को सूचीबद्ध करेंगे।” इस बयान के बाद आंदोलन कर रहे छात्रों और संगठनों को उम्मीद जगी है कि उन्हें न्यायिक राहत मिल सकती है।
वहीं यूजीसी के नए नियमों के विरोध में उत्तर प्रदेश और बिहार में प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया। पीलीभीत में सवर्ण समाज के युवकों ने प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर मुंडन कराकर आक्रोश जताया। लखनऊ और देवरिया में प्रदर्शनकारियों की पुलिस से तीखी नोकझोंक हुई। वहीं पटना (बिहार) में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के पोस्टरों पर कालिख पोती और कुछ स्थानों पर पोस्टर जलाए। रायबरेली में कुछ सवर्ण नेताओं को चूड़ियां भेंट करने का मामला भी सामने आया, जिससे सियासी बयानबाजी तेज हो गई। प्रदर्शनकारियों के हाथों में ‘काला कानून वापस लो’ जैसे नारे लिखी तख्तियां देखी गईं। (पेज 6 पर)











