लोकवाहिनी, संवाददातानई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर चर्चाएं तेज हैं। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए इस डील को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब दिया।
गोयल ने रविवार को अमेरिका के साथ हुई डील पर बोलते हुए रूसी तेल खरीद को लेकर सीधे जवाब देने से परहेज किया। उनसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस शर्त को लेकर सवाल पूछा गया था कि भारत अगर रूस से तेल खरीदेगा तो उस पर 25 फीसदी टैरिफ का जुर्माना फिर से लगा दिया जाएगा।
इस दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि “अमेरिका से तेल खरीदना भारत के हित में है।” गोयल ने कहा, अमेरिका से कच्चा तेल या एलएनजी (LNG), एलपीजी (LPG) की खरीद भारत के अपने रणनीतिक हितों में है क्योंकि हम अपने तेल स्रोतों में विविधता ला रहे हैं। गोयल ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि भारत ने इस समझौते में अपनी संप्रभुता से समझौता किया है। उन्होंने कहा कि ऐसी बातें करने वाले लोग अज्ञानी हैं। यह डील एक ‘लेबर ऑफ लव’ (Labor of Love) है।
कृषि और किसानों के हितों की रक्षा
पीयूष गोयल ने कहा कि कृषि के मामले में भारत के किसानों और उत्पादकों के हितों का 100% ध्यान रखा गया है। उन्होंने बताया कि भारत ने मांस, पोल्ट्री, जीएम फूड्स (GM Foods) या उनके उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी है। इसके अलावा सोया मील, मक्का, चावल, गेहूं जैसे अनाज और ज्वार, बाजरा, रागी जैसी फसलों पर भी कोई छूट नहीं दी गई है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत में पैदा होने वाले फल जैसे केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर, काबुली चना, मूंग जैसी दाल, तिलहन, मूंगफली और शहद जैसे उत्पादों पर भी कोई समझौता नहीं किया गया है। ये सभी उत्पाद भारत के लिए संवेदनशील हैं और इनके मामले में कोई नरमी नहीं बरती गई है।
अमेरिका से कच्चा तेल खरीदने के सवाल पर गोयल ने अंत में स्पष्ट किया कि कौन कहाँ से क्या खरीदेगा, यह फैसला कंपनियां खुद लेती हैं। व्यापार समझौते का काम व्यापार के रास्ते को आसान बनाना है।









