नई दिल्ली। भारत के पासपोर्ट की वैश्विक रैंकिंग में इस साल बड़ा सुधार देखने को मिला है। पिछले एक दशक में भारत की पासपोर्ट रैंकिंग में उतार-चढ़ाव आया है। फरवरी 2026 की ताजा रैंकिंग में भारत का पासपोर्ट 75वें स्थान पर पहुँच गया है। हालाँकि, 75वां स्थान अभी तक का सबसे उच्चतम स्थान नहीं है, यानी अभी भी भारत शीर्ष देशों से काफी पीछे है।
ताज़ा जारी हेनले पासपोर्ट इंडेक्स (Henley Passport Index) के अनुसार भारत 85वें स्थान से बढ़कर 75वें स्थान पर पहुँच गया है। इस सुधार के साथ अब भारतीय नागरिक 56 देशों में वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा के साथ यात्रा कर सकते हैं। हालाँकि भारत अब भी अपने अब तक के सर्वश्रेष्ठ 71वें स्थान (2006) से पीछे है।
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स दुनिया के देशों के पासपोर्ट को इस आधार पर रैंक देता है कि उनके नागरिक बिना पहले से वीजा लिए कितने देशों में प्रवेश कर सकते हैं। किसी देश की रैंक जितनी बेहतर होती है, उसके नागरिकों की वैश्विक यात्रा सुविधा उतनी ज्यादा मानी जाती है।
भारतीय पासपोर्ट धारक अब एशिया, अफ्रीका, कैरेबियन और पैसिफिक क्षेत्र के कई देशों में बिना पूर्व वीजा के यात्रा कर सकते हैं। इनमें भूटान, नेपाल, फिजी, मॉरीशस, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मालदीव और श्रीलंका जैसे लोकप्रिय गंतव्य शामिल हैं। इसके अलावा कई देशों में वीजा-ऑन-अराइवल या ई-वीजा की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे यात्रा प्रक्रिया आसान हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार भारत की बढ़ती वैश्विक पहचान और कूटनीतिक संबंधों का संकेत है। हालाँकि अभी भी कई विकसित देशों में भारतीय नागरिकों को पहले से वीजा लेना पड़ता है। फिर भी 10 पायदान की छलांग को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। भारतीय यात्रियों के लिए यह खबर राहत देने वाली है, क्योंकि अब उन्हें कई देशों की यात्रा के लिए लंबी वीजा प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। आने वाले वर्षों में अगर द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होते हैं, तो भारत की रैंकिंग में और सुधार देखने को मिल सकता है।











