मित्र दलों और निर्दलीयों के समर्थन से बहुमत हासिल
कांग्रेस का दावा फेल, भाजपा की कूटनीति रंग लाई
अकोला महानगरपालिका के महापौर पद के चुनाव में भाजपा की शारदा खेडकर ने विजय प्राप्त की । उन्होंने शिवसेना ठाकरे गुट की सुरेखा काले को 45-32 वोटों से हराया। भाजपा को अपने 38 नगरसेवकों के साथ-साथ शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस के 3, अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस का 1 और शिंदे शिवसेना का 1 नगरसेवक समर्थन मिला। इसके अलावा 2 निर्दलीय नगरसेवकों ने भी भाजपा का समर्थन किया।
कांग्रेस के आघाडी के बंडखोर अपक्ष नगरसेवक आशिष पवित्रकार ने भी अंतिम समय पर भाजपा का समर्थन किया, जिससे बहुमत सुनिश्चित हुआ। एमआईएम के 3 नगरसेवक तटस्थ रहे। बहुमत न होने के बावजूद भाजपा ने मित्र दलों के सहयोग से महापालिका पर अपनी सत्ता बनाए रखी।
इस चुनाव परिणाम के साथ भाजपा की रणनीति और कूटनीति का अकोला महापालिका में बड़ा असर दिखा। कांग्रेस द्वारा दावा किया गया कि भाजपा बहुमत नहीं पा सकेगी, वह फेल हो गया। इस प्रकार, भाजपा ने अपने गठबंधन और सहयोगियों की मदद से महापालिका में सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत की।
शहरवासियों के लिए यह चुनाव राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था। शारदा खेडकर की जीत ने महापालिका में भाजपा की स्थिति को मजबूत किया और आने वाले चुनावों के लिए रणनीतिक संकेत दिए।









