नागपुर, संवाददाता:उत्तर नागपुर के मौजा नारा स्थित 130 एकड़ भूमि, जो डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर राष्ट्रीय पार्क के विकास के लिए आरक्षित है, अब बिल्डरों के कथित कब्जा प्रयासों के चलते विवादों के केंद्र में आ गई है। आंबेडकरी समाज ने आरोप लगाया है कि यह जमीन बेहद कीमती होने के कारण बिल्डर व्यावसायिक लाभ के लिए इसे खरीद-फरोख्त की दिशा में धकेलने का प्रयास कर रहे हैं।
इस प्रकरण पर मुंबई उच्च न्यायालय में सुनवाई निर्णायक टप्पे पर पहुंच चुकी है, और संविधान दिन 26 नवंबर को फैसला आने की प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है। आंबेडकरी समाज की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेश नारनवरे ने कहा कि अदालत ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है और सुनवाई पूरी हो चुकी है। उनके अनुसार, ‘हम आश्वस्त हैं कि निर्णय आंबेडकरी समाज के हित में आएगा। यह फैसला संविधान दिन को आना हमारे समाज के लिए विशेष महत्व रखता है।
कृति समिति की प्रमुख मांगें
नारा की 130 एकड़ भूमि का तत्काल अधिग्रहण,बिल्डरों के व्यावसायिक हितों पर रोक,सामाजिक न्याय विभाग का निधि पार्क के लिए ही उपयोग में लाया जाए। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर राष्ट्रीय पार्क का तत्काल निर्माण प्रारम्भ यह आंदोलन अब आंबेडकरी समाज के व्यापक संघर्ष का प्रतीक बन चुका है, और राज्यभर के सामाजिक संगठन इसके समर्थन में एकजुट हो रहे हैं। अब निगाहें 26 नवंबर के फैसले पर लगी हैं, जो इस महत्वपूर्ण प्रकल्प का भविष्य तय करेगा।








