जिसे मानता था बड़ा भाई, उसने भरोसे का गला घोंटा: पिता
लोकवाहिनी, संवाददाता:नागपुर। अथर्व नानोरे अपहरण और हत्याकांड ने पूरे शहर को सन्न कर दिया है। जिस जय यादव को अथर्व ‘भैया’ कहकर पुकारता था और जिसके साथ वह हंसी-मजाक करता था, उसी जय ने चंद रुपयों की खातिर मासूम का गला घोंट दिया। अथर्व के पिता का कहना है कि जय ने अथर्व का नहीं, बल्कि भरोसे का गला घोंटा है।
दिलीप नानोरे से 50 लाख की फिरौती वसूलने के बाद आरोपी आपस में 15-15 लाख रुपये बांटने वाले थे। बाकी बचे 5 लाख रुपये से अय्याशी करने की प्लानिंग थी। अथर्व के पिता दिलीप नानोरे ने रुंधे गले से बताया कि जय का बड़ा भाई धीरज उनके यहां कार्य करता था। घर से कुछ दूरी पर ही यादव परिवार का मकान है। कई साल से साथ होने के कारण दोनों के पारिवारिक संबंध थे। इसलिए जय का भी उनके घर पर आना-जाना था। घर के छोटे-मोटे कार्य वे जय से ही करवा लिया करते थे। अथर्व उसे बड़ा भाई मानता था। ‘भैया-भैया’ कहकर उसके साथ हंसी-मजाक करता था, लेकिन वही इतना बड़ा विश्वासघात करेगा, यह कभी सपने में भी नहीं सोचा था।
दिलीप नानोरे ने बताया कि अथर्व के लापता होने के बाद खुद जय और उसका भाई धीरज भी अन्य लोगों के साथ तलाश में जुट गए थे। यहां तक कि गिट्टीखदान थाने में शिकायत दर्ज करवाने के समय भी जय साथ था, लेकिन वह केवल भीतर की जानकारी ले रहा था। 3 महीने पहले ही धीरज की शादी हुई है। यादव परिवार के पास पैसे नहीं थे, तब उसके पिता ने आकर मदद की मांग की थी। दिलीप का आरोप है कि यादव परिवार के और भी सदस्य इस वारदात में शामिल थे, जिनसे कड़ी पूछताछ की जानी चाहिए।
नए मोबाइल और सिम कार्ड खरीदे
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने केवल अथर्व का अपहरण कर फिरौती वसूलने की प्लानिंग की थी। बेहोश करने वाला स्प्रे भी खरीदा था। पकड़े जाने से बचने के लिए जय और आयुष ने नए मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी खरीदे थे। इन फोन और सिम का उपयोग दिलीप से फिरौती मांगने के लिए किया जाना था। खरीदे गए स्प्रे का असर नहीं हुआ और जय ने अथर्व के शरीर पर बैठकर उसका गला घोंट दिया। शव को गाड़ी में छोड़ आयुष और कुणाल अपने घर चले गए, लेकिन जय वापस उसी मंदिर में पहुंचा जहां शोभायात्रा का समापन होना था। शोभायात्रा महाप्रसाद के लिए दिलीप 2 बोरा आलू लाए थे। अथर्व के शव को ठिकाने लगाने के लिए जय ने दूसरे दिन उसी बोरे का इस्तेमाल किया।
लगातार बदलता रहा बयान
रविवार की रात एक इमारत में लगे सीसीटीवी कैमरे में जय और अथर्व साथ दिखाई दिए। आखिर पुलिस ने उसी पर ध्यान केंद्रित किया। जय खुद को बचाने के लिए कभी विन्नी का नाम ले रहा था, तो कभी इरफान का। उन लोगों से भी पूछताछ की गई, लेकिन उनका वारदात से कोई लेना-देना नहीं था। तब तक जय का सीडीआर (CDR) भी आ चुका था। उसके लगातार आयुष और कुणाल के संपर्क में होने का पता चला। तीनों से अलग-अलग कमरों में पूछताछ की गई। जय लगातार अपना बयान बदल रहा था, लेकिन जब आयुष और कुणाल सामने आए तो वह समझ गया कि अब भेद खुल चुका है। उसके चेहरे पर शिकन तक नहीं थी। पुलिस द्वारा कड़ाई किए जाने के बावजूद उसकी आंख से एक बूंद आंसू नहीं निकला। उसने पुलिस से कहा कि “मुझे रोना नहीं आता।”







