लोकवाहिनी, संवाददाता:पुणे। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी आगामी बारामती विधानसभा उपचुनाव में उपमुख्यमंत्री एवं राकांपा नेता सुनेत्रा पवार के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगी। निर्वाचन आयोग ने रविवार को घोषणा की कि पुणे के बारामती और अहिल्यानगर के राहुरी में उपचुनाव 23 अप्रैल को होंगे।
बारामती और राहुरी उपचुनाव क्रमशः पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक शिवाजी कर्डिले के निधन के कारण आवश्यक हो गए हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के बारामती से उपचुनाव लड़ने की संभावना है। सुले ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा, “मैंने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि राकांपा (शरद पवार) बारामती उपचुनाव नहीं लड़ेगी। हम सुनेत्रा वाहिनी (भाभी) के खिलाफ अपना उम्मीदवार नहीं उतारेंगे।” राहुरी सीट के संबंध में (विपक्षी) महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के सहयोगी दल इस सीट पर विचार-विमर्श करेंगे और अगले कुछ दिनों में निर्णय लिया जाएगा।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने रविवार को कहा था कि बारामती और राहुरी विधानसभा सीट पर उपचुनाव आम सहमति से निर्विरोध कराए जाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर मुकाबला होता है तो भाजपा इसके लिए तैयार है।
वर्ष 2024 के आम चुनावों में राकांपा (शरद पवार) प्रमुख शरद पवार की बेटी सुले ने अपने चचेरे भाई अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को हराकर बारामती लोकसभा सीट बरकरार रखी थी, जो पहली बार चुनाव लड़ रही थीं। बाद में सुनेत्रा पवार राज्यसभा सदस्य चुनी गईं। इस साल 28 जनवरी को पुणे जिले के बारामती हवाई पट्टी के पास एक विमान दुर्घटना में उनके पति अजित पवार और चार अन्य लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद उन्हें उपमुख्यमंत्री और राकांपा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। अजित पवार के विमान दुर्घटना की जांच के संबंध में सुले ने कहा कि वे इस मामले में पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।
पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच एलपीजी (LPG) की स्थिति के बारे में सुले ने कहा कि केंद्र को एक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए और सभी को विश्वास में लेना चाहिए। उन्होंने कहा, “होटल उद्योग सहित व्यवसायों को भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।” बारामती की सांसद ने इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की भी मांग की। सुले ने कहा, “मुझे आश्चर्य हो रहा है कि राज्य और केंद्र सरकार एलपीजी संकट को स्वीकार क्यों नहीं कर रही है? इसे दबाने की कोशिश क्यों की जा रही है? इस संकट से निपटने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार की जानी चाहिए।”









