पटना: बिहार में शनिवार को चुनावी रणभूमि और भी गर्म हो गई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के शीर्ष नेताओं ने विभिन्न जिलों में रैलियों को संबोधित किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खगड़िया, मुंगेर और नालंदा जिलों में राजग उम्मीदवारों के समर्थन में रैलियां कीं, जबकि राजद नेता तेजस्वी यादव ने खगड़िया और भोजपुर में तीन जनसभाओं को संबोधित किया।
रैलियों में जोरदार शब्दबाण
अमित शाह ने तेजस्वी यादव को “लालू जी का बेटा” बताते हुए कहा कि उन्हें सत्ता से दूर रखना बिहार की मजबूरी है। वहीं तेजस्वी ने खगड़िया और भोजपुर की सभाओं में राजग के 20 सालों के शासनकाल को भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और महंगाई का प्रतीक बताया। रैलियों में उनके समर्थक “बिहार का नायक” लिखे पोस्टर लहराते नजर आए।
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि उनकी खगड़िया रैली को प्रशासन ने रद्द किया क्योंकि सत्ताधारी केंद्रीय गृह मंत्री के कार्यक्रम के लिए हेलीपैड उपलब्ध नहीं था। उन्होंने इसे “सीधी तानाशाही” करार दिया और कहा कि विपक्ष के कार्यक्रमों को रोकना लोकतंत्र के लिए खतरा है।
राजनीतिक विवाद और बयानबाजी
राजद और विधान परिषद के सदस्य मोहम्मद कारी सोहैब के वक्फ बिल पर दिए विवादित बयान ने भी सियासी घमासान बढ़ा दिया। सोहैब ने कहा कि अगर तेजस्वी मुख्यमंत्री बने तो “सभी बिल फाड़ दिए जाएंगे, जिसमें वक्फ बिल भी शामिल है।” भाजपा ने इसे सरकार पर कब्जा करने की मंशा बताया।
पारिवारिक और राजनीतिक तनातनी
तेजस्वी के बड़े भाई तेज प्रताप यादव, जिन्होंने ‘जनशक्ति जनता दल’ बनाई है, अपने भाई की लोकप्रियता को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि तेजस्वी की पहचान अभी भी उनके पिता लालू यादव की वजह से है। तेज प्रताप महुआ सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
राजद ने तेजस्वी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है, जबकि निषाद पार्टी और विकासशील इंसान पार्टी के नेता मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री बनाने का वादा किया गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने घोषणा करते समय कहा कि अन्य सामाजिक और धार्मिक समूहों को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा, लेकिन राजग नेताओं का आरोप है कि अल्पसंख्यक समुदाय की अनदेखी की जा रही है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर बयान जारी किया कि उनकी सरकार ने मुसलमानों के लिए पर्याप्त काम किया है, जबकि विपक्ष केवल वोट बैंक की राजनीति कर रहा है। हालांकि उनकी बिगड़ती सेहत और टिकट वितरण को लेकर मुस्लिम समुदाय में नाराजगी के संकेत हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को होंगे, जबकि परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।









