पटना (बिहार)। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) [जद (यू)] ने शनिवार को निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि बिहार विधानसभा चुनाव एक ही चरण में कराया जाए। पार्टी ने कहा कि महाराष्ट्र में विधानसभा की सीटें बिहार से अधिक होने के बावजूद वहां चुनाव एक ही चरण में हुए, इसलिए बिहार में भी ऐसा किया जा सकता है।
जद (यू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आए आयोग के प्रतिनिधि दल से मुलाकात के बाद पत्रकारों से कहा, “राज्य में न कानून-व्यवस्था की समस्या है और न ही नक्सल हिंसा का असर। जब महाराष्ट्र में एक चरण में चुनाव हो सकते हैं तो बिहार में क्यों नहीं?”
उन्होंने यह भी कहा कि दीपावली और छठ जैसे बड़े पर्व नजदीक हैं और बड़ी संख्या में लोग अन्य राज्यों से अपने घर लौटते हैं। इसलिए चुनाव कार्यक्रम ऐसा बनाया जाए कि वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें और फिर अपने काम पर लौट जाएँ।
झा ने सभी मतदान केंद्रों पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की पर्याप्त तैनाती की भी मांग की, ताकि गरीब और वंचित वर्ग के लोग भय और डर के बिना मतदान कर सकें। उन्होंने कहा कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को सफलतापूर्वक लागू किया गया और इसे पूरे देश में लागू किए जाने लायक बताया जा सकता है।
वहीं, भाजपा ने चुनाव एक या दो चरणों में कराने की मांग की। बिहार भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि मतदान केंद्रों पर बुर्का पहनने वाली महिलाओं के चेहरे का मतदाता पहचान पत्र से मिलान किया जाना चाहिए ताकि केवल वास्तविक मतदाता ही मतदान कर सकें। उन्होंने अति पिछड़े और कमजोर तबकों की आबादी वाले गांवों में अर्धसैनिक बलों की पहले से तैनाती और फ्लैग मार्च कराने की भी आवश्यकता बताई।
मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भी दो चरणों में चुनाव कराने की मांग की, जबकि भाकपा (माले) लिबरेशन ने मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सुधार की मांग की है।
जद (यू) का कहना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था और नक्सल मुद्दे चुनाव के लिए चिंता का विषय नहीं हैं और एक चरण में चुनाव कराने से चुनाव प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी होगी।









