पटना। बिहार विधानसभा चुनाव की रणभूमि में कांग्रेस ने 61 सीटों पर चुनाव लड़ने की सहमति दे दी है। यह पांच साल पहले लड़ी गई 70 सीटों से नौ कम है, लेकिन इस बार कांग्रेस के लिए चुनौती और बड़ी हो गई है। वजह ये कि कई विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी को अपने ही ‘इंडिया’ गठबंधन के सहयोगियों राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के खिलाफ सीधे मुकाबला करना पड़ेगा।
सूत्रों के अनुसार, वैशाली, लालगंज, कहलगांव, राजापाकर और रोसड़ा जैसी सीटों पर कांग्रेस और राजद आमने-सामने होंगी। वहीं, बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार का मुकाबला भाकपा से होगा।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा, “हमारा शीर्ष नेतृत्व जमीनी हालात का आकलन करने में विफल रहा। कई उम्मीदवारों को टिकट दिया गया, जो इसके योग्य नहीं थे। उदाहरण के लिए, बरबीघा सीट पर 2020 में गजानंद शाही सिर्फ 200 वोट के अंतर से हार गए थे, फिर भी इस बार उन्हें टिकट नहीं मिला।”
वहीं, पार्टी ने पूर्व विधायक अमित कुमार टुन्ना (रीगा) और जयेश मंगलम सिंह (बगहा) को टिकट दिया है, जबकि दोनों पिछली बार 25,000 से अधिक वोट के अंतर से चुनाव हार चुके थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने भी हाल ही में इस उम्मीदवार चयन प्रक्रिया पर असंतोष जताया था। उन्होंने कहा, “कांग्रेस में उम्मीदवार चयन में कोई स्पष्ट मानदंड नजर नहीं आता। कुछ उम्मीदवार जिन्हें पिछली बार कुछ सौ वोटों से हार मिली थी, उन्हें मौका नहीं मिला, जबकि बड़े अंतर से हारे उम्मीदवारों को टिकट दिया गया।”
दूसरी ओर, राजद ने पहले ही 143 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया कि बिहार की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते उन्हें सबसे अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने का अधिकार है। राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “इंडिया गठबंधन के सहयोगियों को हमारी मजबूरियों समझनी चाहिए। कुछ सीटों पर कांग्रेस, राजद और भाकपा के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। ऐसे में कांग्रेस को अपने उम्मीदवार वापस लेने चाहिए।”
बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव दो चरणों में होंगे पहला 6 नवंबर और दूसरा 11 नवंबर को। मतगणना 14 नवंबर को होगी। पहले चरण के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर को समाप्त हो चुकी है, जबकि दूसरे चरण के लिए नामांकन सोमवार को बंद होगा।
बिहार विधानसभा की यह सीट बंटवारा और उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया इस बार राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बनी हुई है। कांग्रेस और राजद दोनों ही गठबंधन की जीत के लिए रणनीति को अंतिम रूप दे रहे हैं, लेकिन कई जगह दोस्ताना मुकाबले से चुनावी समीकरण और भी पेचीदा हो गए हैं।









