बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में एक और बड़ी सफलता मिली है। जिले में बुधवार को 51 सक्रिय माओवादियों ने पुलिस और सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण किया, जिनमें नौ महिलाएँ और 42 पुरुष शामिल हैं। राज्य सरकार की “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल और विकास केंद्रित रणनीति के असर से ये सभी माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए तैयार हुए हैं। आत्मसमर्पण करने वालों पर कुल 66 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) बटालियन-1, कंपनी नंबर 1, 2 और 5 के सदस्य, एक एरिया कमेटी सदस्य, सात प्लाटून व एरिया कमेटी पार्टी सदस्य, तीन एलओएस सदस्य, एक मिलिशिया प्लाटून कमांडर और 14 मिलिशिया प्लाटून सदस्य शामिल हैं। सबसे ज्यादा आठ-आठ लाख रुपये का इनाम बुधराम पोटाम उर्फ रंजीत, मनकी कोवासी, हुंगी सोढ़ी, रवीन्द्र पुनेम उर्फ आयतू और देवे करटाम पर था, जबकि मंगू ओयाम उर्फ लालू पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस का कहना है कि सभी ने संविधान पर आस्था व्यक्त करते हुए हिंसा से तौबा की है और समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने की इच्छा जताई है। पुनर्वास के तहत राज्य शासन द्वारा प्रत्येक समर्पित नक्सली को 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी और सामाजिक पुनर्समावेशन की कानूनी प्रक्रिया जारी है। इस सफलता में जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), बस्तर फाइटर, एसटीएफ और सीआरपीएफ का विशेष योगदान रहा।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2025 में अब तक बीजापुर जिले में 461 माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं जबकि सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 138 माओवादी मारे गए और 485 गिरफ्तार हुए हैं। वर्ष 2024 से अब तक जिले में कुल 650 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, वहीं 196 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए और 986 को गिरफ्तार किया गया है। यह आंकड़े बस्तर में नक्सलवाद के कमजोर पड़ने और शांति-स्थापना की दिशा में मजबूत संकेत हैं। बीजापुर के पुलिस अधीक्षक डॉक्टर जितेंद्र कुमार यादव ने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति माओवादियों को आकर्षित कर रही है और उनके परिवार भी चाहते हैं कि वे सामान्य जीवन जिएं। उन्होंने शेष माओवादियों से अपील की कि वे भ्रामक विचारधाराओं को त्यागकर निर्भय होकर मुख्यधारा में लौटें, ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास स्थापित हो सके।
बस्तर संभाग में पिछले कुछ महीनों से लगातार बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण हो रहे हैं। हाल ही में कांकेर में 21, जगदलपुर में 210 और बीजापुर में 103 माओवादियों ने हथियार डाल दिए थे। केंद्र सरकार ने भी देश से नक्सल समस्या को 31 मार्च 2026 तक समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने हालिया बस्तर दौरे में माओवादियों से हिंसा छोड़ने और लोकतांत्रिक व्यवस्था स्वीकार करने की अपील की थी। बीजापुर में 51 माओवादियों का आत्मसमर्पण न सिर्फ सुरक्षाबलों की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि बस्तर में बदलते सामाजिक परिवेश, बढ़ते जन-विश्वास और विकास की नई सुबह का प्रतीक भी है।











