रेस्क्यू टीम की सतर्कता, भालू पूरी तरह सुरक्षित
बुलढाणा शहर से सटे ज्ञानगंगा अभयारण्य क्षेत्र में एक बार फिर इंसान और वन्यजीवन के सह-अस्तित्व की प्रेरणादायक तस्वीर देखने को मिली। मोताला वन परिक्षेत्र अंतर्गत तरोडा–रायपुर शिवार में तीन से चार वर्ष का एक विशालकाय भालू अचानक एक गहरे कुएँ में गिर गया। कुएँ में गिरने के बाद भालू घंटों तक बाहर निकलने के लिए जूझता रहा। भय, थकान और तनाव के कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी।
घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचित किया। सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और विशेष रेस्क्यू टीम बिना समय गंवाए मौके पर पहुँच गई। कुएँ की गहराई और भालू की आक्रामक स्थिति को देखते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था। पूरी सावधानी बरतते हुए भालू को किसी प्रकार की चोट न पहुँचे, इस बात का विशेष ध्यान रखा गया।
रेस्क्यू टीम ने घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद क्रेन, रस्सियों और सुरक्षा उपकरणों की मदद से भालू को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता पाई। जैसे ही भालू कुएँ से बाहर आया, मौके पर मौजूद ग्रामीणों और रेस्क्यू टीम के सदस्यों ने राहत की साँस ली। प्राथमिक जांच के बाद भालू को सुरक्षित जंगल की ओर छोड़ दिया गया।
यह रेस्क्यू ऑपरेशन केवल एक वन्यजीव को बचाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह इंसानियत, संवेदनशीलता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भी मजबूत संदेश देता है। वन विभाग की तत्परता और ग्रामीणों के सहयोग से यह अभियान सफल हो सका, जो भविष्य में इंसान और वन्यजीवन के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।








