भोपाल/चेन्नई। मध्यप्रदेश और तमिलनाडु में बच्चों की मौतों के बाद कोल्डरिफ कफ सिरप को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। छिंदवाड़ा जिले में 7 सितंबर से संदिग्ध गुर्दा संक्रमण के चलते नौ बच्चों की मौत और राजस्थान-मध्यप्रदेश में कुल 11 बच्चों की जान जाने के बाद दोनों राज्य सरकारों ने इस सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शनिवार को ‘एक्स’ पर कहा, “छिंदवाड़ा में कोल्डरिफ सिरप के कारण बच्चों की मौत बेहद दुखद है। इस सिरप की बिक्री पूरे प्रदेश में प्रतिबंधित कर दी गई है। सिरप बनाने वाली कंपनी के अन्य उत्पादों पर भी रोक लगाई जा रही है।” उन्होंने बताया कि यह दवा तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले की एक फैक्ट्री में बनी थी और राज्य सरकार ने तमिलनाडु सरकार से जांच कराने का अनुरोध किया था। जांच रिपोर्ट आने के बाद कड़ी कार्रवाई की गई है और दोषियों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। वर्तमान में छिंदवाड़ा और नागपुर में 13 बच्चों का इलाज चल रहा है।
वहीं, तमिलनाडु सरकार ने भी बड़ा कदम उठाते हुए एक अक्टूबर से राज्यभर में इस दवा की बिक्री पर रोक लगा दी है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले दो दिनों में कांचीपुरम स्थित निर्माण इकाई का निरीक्षण कर नमूने लिए गए हैं। इन्हें सरकारी प्रयोगशालाओं में भेजा गया है ताकि यह जांचा जा सके कि उनमें डाइएथिलीन ग्लाइकॉल जैसे हानिकारक रसायन की मौजूदगी तो नहीं है।
कंपनी फिलहाल राजस्थान, मध्यप्रदेश और पुडुचेरी समेत कई राज्यों को दवाइयां सप्लाई करती थी। वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी बच्चों की मौत के मामलों को गंभीरता से लेते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को परामर्श जारी किया है। इसमें कहा गया है कि दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को खांसी और सर्दी की दवाएं न दी जाएं।
इन मौतों ने दवा निर्माण और निगरानी तंत्र पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं और अब केंद्र व राज्यों की एजेंसियां इस पूरे मामले की गहन जांच में जुट गई हैं।









