लोकवाहिनी, विशेष:मुंबई। रऊफ एन. पटेल ने अपने हलफनामे में कहा है कि लोकतंत्र में पुख्ता सबूतों के साथ शिकायत करने के बाद भी लोगों को जल संसाधन विभाग से न्याय नहीं मिलता है। साथ ही, मैंने महाराष्ट्र राज्य के मुख्य सचिव से भी बार-बार शिकायत की है। इसके बाद भी न तो कोई कार्रवाई हुई और न ही उनसे कोई उत्तर प्राप्त हुए हैं। महाराष्ट्र राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कपूर के खिलाफ पुख्ता सबूत होने के बावजूद मुख्य सचिव उचित कानूनी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इसमें यह नहीं बताया गया कि इस पर क्या कार्रवाई की गयी।
प्रमुख टेंडरों की मंजूरी में गड़बड़ी के लिए दीपक कपूर को जिम्मेदार बताया जा रहा है। दीपक कपूर मंत्रालय में मंजूरी के लिए आने वाले बड़े टेंडरों में शामिल होते हैं। रऊफ एन. पटेल ने कहा कि मुझे इस बात की पूरी जानकारी है कि टेंडर में अनियमितता के कारण सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है, लेकिन यह ज्ञात है कि अवैध काम किया गया है, इसलिए मुझे पता है कि शिकायतों के अभाव में भविष्य में कुछ नहीं होगा। मैंने जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कपूर के खिलाफ शपथ पत्र के साथ एक लिखित शिकायत की है।
100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर दिए गए शपथ पत्र में दीपक कपूर पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। छत्रपति संभाजीनगर जिले में ब्रम्हगव्हाण उपसा सिंचाई योजना ठप होने का आरोप लगाते हुए संबंधित ठेकेदार अम्बरवाडीकर एंड कंपनी पर 1 जनवरी 2017 से 25,000 प्रति दिन का जुर्माना लगाने की भी मांग की है। संशोधित प्रशासनिक मान्यता व बिना विस्तार के जुर्माना लगाए जाने और मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद 30 लाख रुपये का भुगतान करना तथा कलम 4 तहत कोई प्रस्ताव न होने पर 3.25 करोड़ रुपये के भुगतान को दर्शा करके धनराशि की मांग करना।
अम्बरवाडीकर एंड कंपनी के टेंडर को अंतिम रूप दिए बिना, एकतरफा दो टेंडरों की नई दरों पर गणना करना, पिछले 15 वर्षों में कार्य के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण पूरा नहीं करना, माननीय उच्च न्यायालय के प्रतिबंधों के मामले में मेरिट सूची और रोल नंबर की मंजूरी। रऊफ एन. पटेल ने सरकार द्वारा नियुक्त तव्वार कमेटी की जांच रिपोर्ट को वर्ष 2021 से स्वीकार नहीं करने का गंभीर आरोप लगाया है।
दरअसल रऊफ एन. पटेल द्वारा दिए गए हलफनामे के मुताबिक कई आरोप लगाए गए हैं। अब सवाल उठ रहे हैं कि इतनी गंभीर प्रकृति के आरोपों के बावजूद राज्य सरकार एक उच्च पदस्थ अधिकारी, अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कपूर की जांच क्यों नहीं कर रही है।








