मुंबई। महाराष्ट्र कांग्रेस ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी अब “कॉर्पोरेट हिंदुत्व” के रास्ते पर चल रही है—जहां देवी-देवताओं और राष्ट्रीय प्रतीकों के नामों की ब्रांडिंग और बिक्री के जरिए राजनीतिक और आर्थिक लाभ कमाया जा रहा है।
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सचिन सावंत ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि भाजपा का हिंदुत्व अब “आस्था नहीं, बल्कि कारोबार का साधन” बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई मेट्रो स्टेशनों के नाम कॉर्पोरेट प्रायोजकों को बेचकर भाजपा सरकार ने आस्था और सम्मान को बाज़ार का हिस्सा बना दिया है।
सावंत ने उदाहरण देते हुए कहा—
“कोटक छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड सिद्धिविनायक, एचडीएफसी लाइफ महालक्ष्मी और निप्पॉन इंडिया एमएफ आचार्य अत्रे… ये नाम ही बताते हैं कि भाजपा ने देवताओं और राष्ट्रीय प्रतीकों को कॉर्पोरेट बैनर में बदल दिया है।”
फडणवीस सरकार से जवाब की मांग
सावंत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्रियों एकनाथ शिंदे व अजित पवार से सवाल किया—
“जो लोग हर मंच पर छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम लेते हैं, क्या वे उनके नाम के आगे किसी बैंक या कंपनी का ब्रांड जोड़ने की इजाज़त देंगे?”
उन्होंने कहा कि भाजपा नाम बदलने की राजनीति में इतनी उलझ गई है कि बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं जैसे असली मुद्दे गायब हो गए हैं।
“नेहरू के नाम हटाए, कॉर्पोरेट्स को दिए नए नाम”
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने जवाहरलाल नेहरू और संजय गांधी जैसे नेताओं के नाम संस्थानों से हटाकर अपनी विचारधारा की असहिष्णुता दिखाई है।
“जबकि दूसरी ओर, वही सरकार कॉर्पोरेट स्पॉन्सरशिप के लिए राष्ट्रीय प्रतीकों और धार्मिक स्थलों के नाम बेच रही है—यह भाजपा के पाखंड को उजागर करता है।”
“आस्था पर कॉर्पोरेट की नीलामी”
सावंत ने कहा कि हवाई अड्डों और बंदरगाहों के बाद अब धार्मिक व विरासत स्थलों को भी निजी कंपनियों को सौंपा जा रहा है।
“यह विकास नहीं, बल्कि संस्कृति, आस्था और स्वाभिमान की नीलामी है। भाजपा ‘सनातन धर्म’ की बात करती है, लेकिन रुपयों के लिए पवित्र नामों को बेचती है।”
उन्होंने खुलासा किया कि सरकार जल्द ही मेट्रो-3 (एक्वा लाइन) के कालबादेवी और शीतलादेवी स्टेशनों के लिए भी कॉर्पोरेट प्रायोजक खोजने की योजना बना रही है।
कांग्रेस का कहना है कि भाजपा का तथाकथित हिंदुत्व वहीं खत्म हो जाता है, जहां कॉर्पोरेट हित शुरू होते हैं।
सावंत ने चेतावनी दी कि “महाराष्ट्र के लोग देवी-देवताओं और राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे।”









