नई दिल्ली। यूरोप और अमेरिका में जहां भ्रष्टाचार के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है, वहीं भारत में 2024 की तुलना में 2025 में भ्रष्टाचार के मामलों में कमी आई है। ग्लोबल ट्रांसपेरेंसी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2025 के दौरान भ्रष्टाचार के मामलों में बीते वर्ष की तुलना में कमी दर्ज की गई है। रिपोर्ट बताती है कि 2024 की तुलना में 2025 में भारत की रैंकिंग और स्कोर दोनों में सुधार हुआ है।
ग्लोबल ट्रांसपेरेंसी द्वारा जारी करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (CPI) में भारत अब 180 देशों की सूची में 91वें स्थान पर पहुंच गया है। भारत का कुल स्कोर 39 बताया गया है, जो पिछले तीन वर्षों में धीरे-धीरे बेहतर हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, डेनमार्क दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जहां भ्रष्टाचार के मामले सबसे कम पाए गए हैं और वह लगातार शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। दूसरी ओर, दक्षिण सूडान और सोमालिया को दुनिया के सबसे भ्रष्ट देशों की श्रेणी में रखा गया है। इन देशों का स्कोर सबसे निचले स्तर पर है। इस रिपोर्ट में दुनिया के कुल 180 देशों का मूल्यांकन किया गया है, जिसमें सरकारी पारदर्शिता, संस्थागत मजबूती और सत्ता के दुरुपयोग जैसे पहलुओं को आधार बनाया गया।
यूरोपीय देशों और अमेरिका की स्थिति
यूरोपीय देशों के लिए यह रिपोर्ट चिंता बढ़ाने वाली है। भ्रष्टाचार को लेकर जारी सूची में सिर्फ 7 ऐसे देश हैं, जिनका स्कोर 80 से अधिक है। ब्रिटेन, फ्रांस और इटली जैसे बड़े देशों के स्कोर में गिरावट दर्ज की गई है। खास बात यह है कि केवल जर्मनी ही ऐसा यूरोपीय देश रहा, जहां भ्रष्टाचार के मामलों में कुछ कमी देखने को मिली है। ब्रिटेन, जो कभी शीर्ष 20 ईमानदार देशों में शामिल रहता था, अब इस सूची से बाहर हो चुका है।
रिपोर्ट में अमेरिका की स्थिति में भी गिरावट दर्ज की गई है। 2024 में भ्रष्टाचार के मामले में अमेरिका 28वें स्थान पर था, जो अब खिसककर 29वें स्थान पर पहुंच गया है। यह गिरावट ऐसे समय में सामने आई है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सार्वजनिक मंचों से भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के दावे कर रहे हैं। वहीं चीन में तमाम सख्त अभियानों और दावों के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। चीन का स्कोर 43 पर स्थिर है और भ्रष्टाचार के मामले में वह 76वें स्थान पर बना हुआ है।
भारत के लिए संकेत
भारत की बात करें तो 2023 में देश 93वें स्थान पर था। 2024 में मामूली गिरावट के बाद अब 2025 में भारत 91वें स्थान पर पहुंच गया है। यह संकेत जरूर देता है कि स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि 39 का स्कोर अभी भी गंभीर श्रेणी में आता है। रिपोर्ट यह भी साफ करती है कि भारत को भ्रष्टाचार के खिलाफ अभी लंबा रास्ता तय करना है, क्योंकि कई देशों की तुलना में स्थिति अब भी कमजोर बनी हुई है।









