नयी दिल्ली। दिल्ली सरकार द्वारा 2017 में शुरू किए गए ‘एनआईओएस प्रोजेक्ट’ के तहत पिछले चार वर्षों में 10वीं कक्षा के लगभग 70 फीसदी छात्र फेल हुए हैं। यह जानकारी सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त उत्तर में दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने साझा की है।
इस योजना की शुरुआत उन छात्रों की मदद के लिए की गई थी, जो नौवीं और 10वीं कक्षा में फेल हो रहे थे या स्कूल छोड़ने लगे थे। योजना के तहत कमजोर छात्रों का पंजीकरण राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) में कराया जाता है और उन्हें स्कूल में ही अलग कक्षाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
शिक्षा निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में एनआईओएस प्रोजेक्ट में 7,794 बच्चों का पंजीकरण हुआ, लेकिन सिर्फ 37 फीसदी यानी 2,842 छात्र ही परीक्षा उत्तीर्ण कर सके। पिछले चार साल के आंकड़ों को देखा जाए तो केवल 30 फीसदी छात्र-छात्राएं ही पास हुए, जबकि लगभग 70 फीसदी छात्र फेल रहे।
मुख्य कारण: समन्वय और कमजोर स्कूल वातावरण
दिल्ली के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बच्चों के फेल होने के मुख्य कारणों में समन्वय की कमी और कमजोर स्कूल वातावरण शामिल हैं। उन्होंने कहा कि एनआईओएस प्रोजेक्ट से जुड़े शिक्षक पंजीकृत बच्चों के माता-पिता से संपर्क नहीं करते और कक्षाओं में नियमित पढ़ाई नहीं कराते। इसके अलावा, प्रधानाचार्य अपने स्कूल के 10वीं के परिणाम सुधारने के लिए कमजोर छात्रों को एनआईओएस में पंजीकृत कर देते हैं, जिससे ये छात्र अन्य छात्रों से अलग हो जाते हैं।
अभिभावकों की चिंता और आलोचना
ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा,
“गरीब और कमजोर वर्ग के छात्र नियमित शिक्षा के लिए स्कूल आते हैं, लेकिन सरकारी स्कूल 10वीं के परिणाम सुधारने के लिए बच्चों को एनआईओएस भेज देते हैं, जहां CBSE पाठ्यक्रम के विपरीत अत्यंत सीमित और दोयम दर्जे की पढ़ाई होती है। बच्चों का भविष्य इसी से प्रभावित हो रहा है। भले ही छात्र परीक्षा पास कर लें, उन्हें 11वीं में दाखिला केवल कला संकाय में ही मिल सकता है। यह बच्चों के भविष्य के साथ खेलना है।”
परीक्षा शुल्क और फीस संरचना
एनआईओएस प्रोजेक्ट के तहत पंजीकरण कराने वाले छात्रों के लिए प्रति विषय 500 रुपये परीक्षा शुल्क तय किया गया है। यदि किसी विषय में प्रैक्टिकल शामिल है, जैसे पेंटिंग, होम साइंस या कंप्यूटर साइंस, तो प्रत्येक प्रैक्टिकल विषय के लिए अतिरिक्त 120 रुपये देने होते हैं।
- पांच विषयों के लिए पंजीकरण शुल्क: 500 रुपये
- अतिरिक्त विषय: 200 रुपये प्रति विषय
- क्रेडिट ट्रांसफर (TOC) शुल्क: 230 रुपये प्रति विषय
विशेषज्ञों का निष्कर्ष
शिक्षकों और विशेषज्ञों का कहना है कि एनआईओएस प्रोजेक्ट के तहत पढ़ाई करने वाले छात्रों को अन्य छात्रों जितना उचित और गुणवत्तापूर्ण वातावरण नहीं मिलता, जिससे उनकी शैक्षिक प्रगति प्रभावित होती है। इसके अलावा, स्कूल प्रशासन के केवल परिणाम सुधारने के उद्देश्य से एनआईओएस पंजीकरण करना, छात्रों के भविष्य और करियर के लिए चिंता का विषय बन गया है।








