भाजपा शहर सरचिटणीस अमित घुगे ने टिकट न मिलने से नाराज़ होकर पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने भाजपा शहर सरचिटणीस पद से इस्तीफा देते हुए आगामी चुनाव निर्दलीय रूप से लड़ने का ऐलान किया है। घुगे के इस फैसले से शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और भाजपा की अंदरूनी कलह एक बार फिर सामने आ गई है।
अमित घुगे ने कहा कि वे पिछले 20 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी के निष्ठावान और समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं। उन्होंने संगठन के लिए लगातार काम किया और हर चुनाव में पार्टी को मजबूत करने का प्रयास किया। घुगे का दावा है कि प्रभाग क्रमांक 1 से उन्हें मजबूत जनसमर्थन प्राप्त था और स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ काफी मजबूत मानी जा रही थी। इसके बावजूद पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं देकर उनके साथ अन्याय किया है।
घुगे ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि टिकट वितरण के दौरान किए गए सर्वे को मनमाने तरीके से बदला गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और बार-बार संपर्क करने के बावजूद नेतृत्व ने उनका फोन तक नहीं उठाया। इन घटनाओं से आहत होकर उन्होंने यह कठोर निर्णय लेने का दावा किया।
इस्तीफे के साथ ही अमित घुगे ने यह स्पष्ट किया कि वे जनता के समर्थन के दम पर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरेंगे। उनका कहना है कि वे पार्टी से नहीं, बल्कि जनता से जुड़े हैं और जनादेश का सम्मान करेंगे।
अमित घुगे के इस कदम को भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इसका असर स्थानीय चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाता है।






