नागपुर। कांग्रेस व वंचित बहुजन अघाड़ी ने एपस्टीन फाइल्स को लेकर संघ मुख्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। इस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तंज कसते हुए कहा कि संविधान हर किसी को आंदोलन का अधिकार देता है, लेकिन कांग्रेस नेताओं को खुद यह नहीं पता कि उन्हें आंदोलन क्यों करना है। रविवार को नागपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने इसे केवल मीडिया में बने रहने का प्रयास करार दिया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) भाजपा की मातृ संस्था है। भाजपा पर अक्सर आरएसएस के इशारे पर काम करने का आरोप लगता रहा है। इससे पहले, बामसेफ और भारत मुक्ति मोर्चा ने आरएसएस मुख्यालय के सामने मार्च निकाला था। नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय के सामने मार्च में आरोप लगाया गया था कि आरएसएस के इशारे पर बामसेफ कार्यक्रम को अनुमति नहीं दी गई थी। अब कांग्रेस और वंचित बहुजन अघाड़ी आरएसएस मुख्यालय तक मार्च निकालने जा रहे हैं।
यह मार्च एपस्टीन मामले को लेकर है। इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए मार्च में स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। यह मार्च सोमवार को निकाला जाएगा। इसके चलते सरकार और पुलिस अलर्ट मोड पर है। सत्ताधारी पार्टी भी इस मार्च पर नजर रखे हुए है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस पर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी को भी किसी के भी खिलाफ मार्च निकालने का अधिकार है। लेकिन फडणवीस ने इस बात की आलोचना की कि मार्च निकालने वालों को खुद नहीं पता कि वे किसलिए मार्च निकाल रहे हैं। कानून व्यवस्था कायम रहनी चाहिए, पुलिस इसका ध्यान रखेगी। लोकतंत्र में कोई भी किसी के भी खिलाफ मार्च निकाल सकता है। लेकिन उन्हें पता नहीं कि वे किसलिए मार्च निकाल रहे हैं। उनके पास कोई सबूत नहीं है। उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वे सिर्फ मीडिया में आई खबरों के आधार पर मांग कर रहे हैं और मीडिया में बने रहने के लिए मार्च निकाल रहे हैं, फडणवीस ने नागपुर में मीडिया से बात करते हुए कहा।











