घंटागाड़ी कर्मियों का वेतन तीन माह से लंबित
आर्थिक तंगी में कर्मचारी ने खाया जहर
पीएफ बकाया को लेकर पहले हो चुका है आंदोलन
ठेकेदार और प्रशासन पर कार्रवाई की मांग
महाराष्ट्र के धुलिया में महानगरपालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। धुलिया महानगरपालिका के अंतर्गत काम करने वाले घंटागाड़ी कर्मचारियों का पिछले तीन महीनों से वेतन बकाया है। आर्थिक तंगी से परेशान एक कर्मचारी ने आत्महत्या का प्रयास किया।
मिली जानकारी के अनुसार, कर्मचारी युवराज सारवान ने कथित तौर पर विषाक्त दवा का सेवन कर लिया। हालत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि घंटागाड़ी कर्मचारियों ने बकाया वेतन और पिछले दो वर्षों से लंबित पीएफ की मांग को लेकर कचरा डिपो पर ‘भीख मांगो आंदोलन’ भी किया था। हालांकि, प्रशासन ने आंदोलन वापस लेने के निर्देश देते हुए कर्मचारियों को काम पर लौटने को कहा था।
इस घटना के बाद शहर में आक्रोश का माहौल है। सामाजिक कार्यकर्ता मयूर बैसाणे ने संबंधित कचरा ठेकेदार और महापालिका प्रशासन के खिलाफ मामला दर्ज करने की चेतावनी दी है। स्थानीय नागरिकों और कर्मचारियों का कहना है कि समय पर वेतन और पीएफ न मिलना श्रमिकों के साथ अन्याय है। अब इस मामले ने तूल पकड़ लिया है और प्रशासन पर जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ गया है।
फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन बकाया भुगतान और जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कदम उठाता है।







