लोकवाहिनी, संवाददाता,अकोला। शिवसेना प्रमुख और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे को एक बार फिर बड़ा झटका दिया है। शिवसेना (ठाकरे गुट) के जिला प्रमुख समेत चार पार्षद शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो गए हैं। पार्टी में शामिल होने का समारोह ठाणे में आधी रात के आसपास हुआ।
शिवसेना (ठाकरे गुट) के छह पार्षद अकोला नगर निगम के लिए निर्वाचित हुए थे। इनमें से चार पार्षदों ने पाला बदलकर शिवसेना (शिंदे समूह) का झंडा अपने कंधों पर उठा लिया। नगर निगम चुनावों के बाद अकोला में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। चुनाव के बाद जो राजनीतिक गतिविधियां शांत हो गई थीं, वे एक बार फिर तेज हो गई हैं।
हाल ही में हुए अकोला नगर निगम चुनावों में शिवसेना (ठाकरे समूह) के छह पार्षद चुने गए थे, जबकि शिवसेना (शिंदे समूह) का केवल एक पार्षद निर्वाचित हुआ था। अब नगर निगम में महापौर, उप-महापौर, स्थायी समिति अध्यक्ष और मनोनीत सदस्यों के चुनाव के बाद बड़ा उलट-फेर मच गया है। भाजपा के नेतृत्व वाले नगर विकास गठबंधन के तहत अकोला नगर निगम में शिवसेना का शिंदे गुट सत्ता में है, जबकि ठाकरे गुट विपक्ष में है। इसी बीच, ठाकरे गुट के पार्षद अलग होकर शिंदे गुट में शामिल हो गए।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई। इसके बाद, एकनाथ शिंदे मंगलवार देर रात राज्य लौट आए और रात करीब 2 बजे ठाणे पहुंचे। उस समय अकोला से ठाकरे गुट के पार्षद वहां पहुंच चुके थे। रात 2 बजे इन पार्षदों ने ठाणे में एकनाथ शिंदे के ‘आनंदाश्रम’ स्थित आवास पर शिवसेना में प्रवेश किया।
शामिल होने वाले नेता:
शिवसेना (ठाकरे गुट) के जिला प्रमुख मंगेश काले, पार्षद मनोज पाटिल, सागर भिरड़, सुरेखा काले और सोनाली सानप शिवसेना में शामिल हुए हैं। इसके चलते अब अकोला नगर निगम में ठाकरे समूह के केवल दो पार्षद ही बचे हैं। पार्षदों के दलबदल से ठाकरे समूह को गहरा झटका लगा है और आने वाले दिनों में दोनों सेनाओं के बीच संघर्ष बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि नगर निगम में सत्ता समीकरण बनने के बाद ठाकरे गुट के पार्षदों ने पाला बदल लिया। शिंदे गुट में शामिल होने के साथ-साथ अब वे अकोला नगर निगम में सत्ता में आ गए हैं।











