2027 जनगणना की प्रश्नावली में ओबीसी कॉलम नहीं होने पर जताई नाराजगी
ओबीसी की वास्तविक संख्या के बिना योजनाएं बनाना मुश्किल : साल्वे
केंद्र और राज्य सरकार से ओबीसी जनगणना कराने की मांग तेज
नागपुर/मुंबई:देश और राज्य में सत्तारूढ़ सरकार को ओबीसी समाज की अलग जनगणना कराने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। यह मांग डॉ. एडवोकेट अंजलि साल्वे ने राज्य सरकार से की है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को ओबीसी की स्वतंत्र जनगणना कराने के लिए बाध्य करना चाहिए, ताकि देशभर के ओबीसी समाज को न्याय मिल सके।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की प्रदेश सरचिटणीस डॉ. अंजली साल्वे ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, गृहमंत्री तथा अन्य पिछड़ा वर्ग एवं बहुजन कल्याण मंत्री को भेजे गए निवेदन में यह मांग रखी है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा घोषित भारत की जनगणना 2021 की प्रश्नावली में ओबीसी के लिए अलग कॉलम शामिल करने की मांग लंबे समय से की जा रही है।
उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर उन्होंने पहले बॉम्बे हाई कोर्ट नागपुर बेंच में हस्तक्षेप याचिका दायर की थी और मामला भारत के सर्वोच्च न्यायालय तक भी पहुंचाया गया। इसके अलावा कई विधायकों को ज्ञापन देकर वर्ष 2020 में महाराष्ट्र विधानसभा में ओबीसी जनगणना से संबंधित प्रस्ताव पारित कराने में भी पहल की गई थी।
डॉ. साल्वे ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण जनगणना प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया था और अब केंद्र सरकार ने 2027 की जनगणना की घोषणा की है। इसके तहत 1 अप्रैल 2026 से पहला चरण शुरू होने जा रहा है, लेकिन नई प्रश्नावली में भी ओबीसी वर्ग को अलग से शामिल नहीं किया गया है, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 16(4) और 340 तथा जनगणना अधिनियम 1948 के अनुसार ओबीसी की वास्तविक संख्या का पता होना जरूरी है। बिना आंकड़ों के सरकार योजनाएं कैसे बनाएगी, यह बड़ा सवाल है। इसलिए राज्य सरकार को तुरंत प्रस्ताव पारित कर केंद्र से ओबीसी की अलग जनगणना कराने की मांग करनी चाहिए।









