चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने गाज़ा में चल रहे हिंसक हमलों को लेकर केंद्र सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी नैतिक भूमिका निभाते हुए इज़राइल पर दबाव बनाना चाहिए ताकि गाज़ा में हो रहे नरसंहार को रोका जा सके। स्टालिन यह बयान चेन्नई में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) द्वारा आयोजित सर्वदलीय विरोध सभा को संबोधित करते हुए दे रहे थे। उन्होंने कहा कि इज़राइल द्वारा गाज़ा पर किए जा रहे अंधाधुंध हमले सभी के दिलों को झकझोर रहे हैं और यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि मानवता की परीक्षा है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि माकपा का विरोध प्रदर्शन मानवीय मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय न्याय के समर्थन में उठाई गई सामूहिक आवाज़ है, ताकि सत्तारूढ़ ताकतों से उन हमलों को रोकने का आग्रह किया जा सके जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों और संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों का उल्लंघन कर रहे हैं। स्टालिन ने याद दिलाया कि उन्होंने पहले भी गाज़ा में हो रही हत्याओं के खिलाफ सार्वजनिक रूप से अपनी चिंता जताई थी। 8 सितंबर को अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि गाज़ा में जो कुछ हो रहा है, वह शब्दों से परे है और निर्दोष लोगों की जान इस तरह कुचली जा रही हो, तो चुप रहना कोई विकल्प नहीं।
सभा में माकपा नेताओं ने केंद्र सरकार से अपील की कि भारत इज़राइल के साथ सभी व्यापारिक समझौतों को रद्द करे, खासकर रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्रों में चल रहे सहयोग पर तुरंत रोक लगाए। उन्होंने ‘एयरोडेफकॉन 2025 सम्मेलन’ में भाग ले रही इज़राइली कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की। इस प्रदर्शन में विभिन्न दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और गाज़ा में शांति और मानवाधिकारों की बहाली की जोरदार मांग की।
स्टालिन का यह बयान तमिलनाडु और पूरे देश में गाज़ा में हो रहे हिंसक हमलों के खिलाफ बढ़ती चिंता को उजागर करता है और भारत की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी पर भी प्रकाश डालता है।











