नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के बजट सत्र की शुरुआत पर बुधवार को लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित किया। राष्ट्रपति ने सरकार की प्राथमिकताओं, उपलब्धियों और आगे की दिशा को साफ शब्दों में रखा है। विपक्ष के हंगामे के बीच शुरू हुए इस भाषण में सामाजिक न्याय, अर्थव्यवस्था, अंतरिक्ष, पूर्वी भारत और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दे छाए रहे।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला का अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) तक पहुँचना एक ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत है। वहीं विपक्षी सांसद खड़े होकर ‘जी राम-जी बिल’ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए कानून को वापस लेने की मांग करने लगे। राष्ट्रपति ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
गगनयान मिशन पर देश उत्साह के साथ काम कर रहा है, और अब अंतरिक्ष पर्यटन भी भारतीयों की पहुँच में आता दिख रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सरकार पूर्वी भारत के विकास को विशेष प्राथमिकता दे रही है। बुनियादी ढांचे, उद्योग और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए इस क्षेत्र में कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। उन्होंने संकेत दिए कि क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करना सरकार की विकास नीति का अहम हिस्सा है, ताकि हर हिस्से में समान प्रगति सुनिश्चित हो सके।
राष्ट्रपति ने कहा कि देश में इस समय 150 वंदे भारत ट्रेनें संचालित हो रही हैं, जो आधुनिक बुनियादी ढांचे का प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि यूरोपीय संघ के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों को नई गति देगा और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पुराने नियमों में बदलाव किया जा रहा है और सरकार ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के रास्ते पर आगे बढ़ रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि पिछड़े वर्गों का कल्याण सरकार की प्राथमिकता है और महिलाओं को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के जरिए सशक्त बनाया जा रहा है। उन्होंने ऑपरेशन विजय का जिक्र करते हुए कहा कि इस अभियान ने भारत के साहस और संकल्प को दुनिया के सामने रखा है।








