
लोकवाकिकी, संवाददाता:नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वक्फ संपत्तियों के डिजिटल पंजीकरण की समय सीमा बढ़ाने से इनकार करते हुए साफ कर दिया है कि तय डेडलाइन का पालन अनिवार्य होगा। हालांकि, उन लोगों को तीन महीने की राहत दी गई है जिन्होंने पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी लेकिन किसी कारण पूरा नहीं कर पाए। यह फैसला ऐसे समय आया है जब लाखों शिकायतों के पंजीकरण में देरी की शिकायतें सामने आई हैं। अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों को अपलोड करने की छह माह की समय सीमा शुक्रवार को समाप्त हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के चलते समय सीमा बढ़ाना संभव नहीं है।
रिजिजू ने कहा कि शुक्रवार सुबह तक 1.51 लाख संपत्तियों का ही पंजीकरण हो सका, जबकि देशभर में नौ लाख से अधिक संपत्तियों को सूचीबद्ध किया जाना है। रिजिजू ने कहा कि जो मुतवल्ली पंजीकरण की कोशिश कर चुके हैं लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए, उन्हें तीन महीनों तक किसी भी प्रकार का दंड नहीं लगाया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ऐसे मामलों को पूरे सरकार सम्मान खोलेगी और उन्हें पूरा समय दिया जाएगा। हालांकि, जिन लोगों ने बिल्कुल भी पंजीकरण की कोशिश नहीं की है, उन्हें अपने वक्फ ट्रिब्यूनल से संपर्क करना होगा।
मंत्री ने बताया कि कर्नाटक, पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन कई राज्य काफी पीछे रह गए हैं। कुछ जगहों पर पोर्टल धीमा होने की शिकायतें आईं और कई मुतवल्लियों के पास जरूरी कागजी दस्तावेज नहीं थे, जिसके चलते प्रक्रिया अधूरी रही गई। रिजिजू ने कहा कि उम्मीद पोर्टल का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों को डिजिटल इन्वेंट्री तैयार करना और प्रशासन को आधुनिक व पारदर्शी बनाना है। सरकार चाहती है कि वक्फ संपत्तियों की पूरी क्षमता अल्पसंख्यक समुदायों के विकास में उपयोग हो। उन्होंने कहा कि मंत्रालय वक्फ प्रबंधन प्रणाली को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है। रिजिजू ने दोहराया कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पंजीकरण की तारीख नहीं बढ़ाई जा सकती। इसलिए केंद्र के पास समय सीमा बढ़ाने का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार नियमों का पालन करवाएगी, लेकिन जिन लोगों ने ईमानदारी से प्रक्रिया शुरू की थी, उनके साथ नरमी बरती जाएगी।











