लोकवाहिनी, संवाददाता:हिंगना। नागपुर महानगर प्रादेशिक विकास प्राधिकरण (NMRDA) की ओर से हाई-टेक ‘न्यू सिटी’ के रूप में ‘नया नागपुर’ विकसित करने की दिशा में एक बड़ी पहल की जा रही है, जिसका उद्देश्य शहर को स्टार्टअप, एमएसएमई (MSME), प्रौद्योगिकी फर्मों और अंतरराष्ट्रीय सेवा प्रदाताओं के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है। प्रकल्प के अनुसार नए विकास की पहल में अत्याधुनिक अंडरग्राउंड नागरिक सुविधाओं की एकीकृत सेवाओं की प्रणाली भी होगी।
NMRDA ने शहर के विस्तार और आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘नया नागपुर’ के विकास की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह भविष्य की परियोजना 1,710 एकड़ में साकार होगी। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए प्राधिकरण ने सलाहकार नियुक्त करने हेतु एक ई-टेंडर नोटिस जारी किया है।
जारी की गई निविदा के अनुसार, नियुक्त किए जाने वाले सलाहकार को एक स्थायी और टिकाऊ मॉडल पर आधारित ‘नया नागपुर’ की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करनी होगी। इसके अंतर्गत सलाहकार को व्यापक आर्किटेक्चरल और इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी सेवाएं प्रदान करनी होंगी।
इसमें मुख्य रूप से शहर का मास्टरप्लान तैयार करना, आंतरिक और बाहरी बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) का विकास तथा लैंडस्केपिंग का खाका तैयार करना शामिल है। गौरतलब है कि इस कार्य के लिए प्राधिकरण द्वारा यह दूसरी बार निविदा आमंत्रित की जा रही है। इस प्रोजेक्ट की रूपरेखा तैयार करने की समय सीमा 36 महीने (3 साल) तय की गई है।
‘नया नागपुर’ परियोजना नागपुर को एक विश्व स्तरीय शैक्षणिक, औद्योगिक और चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य व्यापार और उद्योग के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं, स्मार्ट यूटिलिटी समाधानों और ग्रीन वॉक-एंड-फ्लाई सुविधा के साथ एक नियोजित, हरित और स्मार्ट कॉर्पोरेट शहर का निर्माण करना होगा।
NMRDA की ओर से तैयार की गई योजना के अनुसार इसके लिए 692.06 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। माना जा रहा है कि शहर में वीएनआईटी (VNIT), आईआईएम (IIM), ट्रिपल आईटी (IIIT), एम्स (AIIMS) जैसी राष्ट्रीय और राज्य स्तर की उच्च शिक्षा की लगभग 275 से अधिक शैक्षणिक संस्थाएं यहाँ हैं।
यह परियोजना नागपुर जिले की हिंगना तहसील के मौजा घोपली (रेती) और मौजा लाडगांव (रेती) गांवों में विकसित की जाएगी। कुल क्षेत्रफल लगभग 692.06 हेक्टेयर है। इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का अनुमानित खर्च 3,000 करोड़ रुपये है। पहले चरण के विकास के लिए लगभग 3,400 करोड़ रुपये का खर्च अपेक्षित है। कुल अनुमानित खर्च 6,400 करोड़ रुपये है। एनबीसीसी (NBCC India Limited) को इस परियोजना के लिए सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया है।







