हैदराबाद | तेलंगाना की नौकरशाही और राजनीति के गलियारों में एक बार फिर टकराव की आहट सुनाई दे रही है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सैयद अली मुर्तजा रिजवी ने आठ साल की सेवा बाकी रहते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। उनके इस कदम ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने इसे “सरकार द्वारा नौकरशाहों को प्रताड़ित करने” का उदाहरण बताया है।
रिजवी का VRS और शुरू हुई सियासी हलचल
वर्ष 2001 बैच के अधिकारी रिजवी वर्तमान में राजस्व विभाग (निषेध एवं उत्पाद शुल्क) के प्रधान सचिव थे। उन्होंने 31 अक्टूबर 2025 से वीआरएस लेने का विकल्प चुना, जिसे राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी। हालाँकि उन्होंने अपने निर्णय की कोई सार्वजनिक वजह नहीं बताई, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, आबकारी मंत्री जुपल्ली कृष्णा राव के साथ टकराव इस फैसले की जड़ में है।
विवाद की जड़: शराब की बोतलों पर ‘हाई-सिक्योरिटी होलोग्राम’ टेंडर
जानकारी के मुताबिक, मतभेद एक 100 करोड़ रुपये की परियोजना को लेकर हैं — यह परियोजना शराब की बोतलों की ट्रैकिंग और प्रमाणीकरण के लिए हाई-सिक्योरिटी होलोग्राम से जुड़ी है।
मंत्री कृष्णा राव ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि रिजवी ने इस टेंडर प्रक्रिया को “जानबूझकर रोक दिया” और एक पुराने विक्रेता को छह साल से अधिक समय तक बिना प्रतिस्पर्धा के काम जारी रखने दिया, जबकि अनुबंध जून 2019 में समाप्त हो चुका था।
मंत्री की सिफारिश: रिजवी पर कार्रवाई हो
पत्र में मंत्री ने न केवल रिजवी के वीआरएस को अस्वीकार करने की सिफारिश की, बल्कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई करने की भी बात कही।
BRS का पलटवार: “ईमानदार अफसरों को झुका रही सरकार”
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव ने सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा, “आईएएस और आईपीएस अधिकारी अब मजबूर होकर वीआरएस ले रहे हैं क्योंकि उनसे गैरकानूनी आदेश मानने का दबाव डाला जा रहा है। रिजवी ने आबकारी मंत्री के अनुचित निर्देशों को मानने से इनकार किया, और यही उनकी गलती मानी गई।”
सरकार का रुख और नई नियुक्ति
राज्य सरकार ने विवाद के बीच रिजवी का वीआरएस स्वीकार करते हुए एम. रघुनंदन राव (IAS, 2002) को राजस्व (वाणिज्यिक कर एवं उत्पाद शुल्क) विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है।
नौकरशाही में असंतोष, राजनीति में गरमाहट
तेलंगाना में हाल के महीनों में यह तीसरा मामला है जब वरिष्ठ अधिकारी ने समयपूर्व सेवानिवृत्ति ली है। विपक्ष और प्रशासनिक हलकों का कहना है कि “राजनीतिक दखल और अनुचित दबाव” नौकरशाही की स्वतंत्रता को कमजोर कर रहा है।
वहीं, सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
रिजवी का वीआरएस केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि सत्ता और नौकरशाही के रिश्तों में बढ़ती खटास का संकेत है। आने वाले दिनों में यह मामला तेलंगाना की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।







