नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 7.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया गया है। आधार वर्ष में बदलाव और गणना पद्धति में संशोधन के बाद जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाया गया है। शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 2022-23 को नया आधार वर्ष बनाते हुए वार्षिक और तिमाही राष्ट्रीय लेखा अनुमान की नई श्रृंखला जारी की। इससे पहले आधार वर्ष 2011-12 था। यह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) श्रृंखला के आधार वर्ष में नौवां संशोधन है।
मंत्रालय ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में स्थिर कीमतों पर जीडीपी का आकार 322.58 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि 2024-25 में यह 299.89 लाख करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2024-25 में वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रही थी। नई श्रृंखला के मुताबिक, 2025-26 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही, जो एक वर्ष पहले की समान तिमाही के 7.4 प्रतिशत से अधिक है। यह वृद्धि मुख्य रूप से विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन से हुई।
इसके साथ ही जुलाई-सितंबर 2025 तिमाही की वृद्धि दर को 8.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.4 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि, अप्रैल-जून तिमाही का वृद्धि अनुमान 7.8 प्रतिशत से घटाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया गया है। चालू वित्त वर्ष में मौजूदा कीमतों पर जीडीपी में 8.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
मंत्रालय ने कहा कि ये दरें पुराने आधार वर्ष (2011-12) पर तैयार पहले अग्रिम अनुमानों की तुलना में अधिक हैं। इसके साथ ही मंत्रालय ने कहा कि 2023-24 और 2024-25 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर क्रमशः 7.2 प्रतिशत एवं 7.1 प्रतिशत रही, जबकि मौजूदा कीमतों पर वृद्धि दर 11 प्रतिशत एवं 9.7 प्रतिशत दर्ज की गई।
आधार वर्ष के पुनर्निर्धारण के बाद लगातार तीन वित्त वर्षों में विनिर्माण क्षेत्र अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रदर्शन का प्रमुख आधार रहा है। इस क्षेत्र ने 2023-24 और 2025-26 में दहाई अंकों में वृद्धि दर्ज की है। ‘व्यापार, मरम्मत, होटल, परिवहन, संचार एवं प्रसारण और भंडारण से संबंधित सेवाएं’ क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2025-26 में स्थिर कीमतों पर 10.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। वहीं, खपत के मोर्चे पर निजी अंतिम उपभोग व्यय और सकल स्थिर पूंजी निर्माण दोनों में ही सात प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई।
नई राष्ट्रीय आय श्रृंखला में जीएसटी, लोक वित्त प्रबंधन प्रणाली (PFMS) और ई-वाहन पोर्टल जैसे नए डेटा स्रोतों का उपयोग किया गया है, जिससे अनुमानों की सटीकता और समयबद्धता बढ़ी है। इसके अलावा नई श्रृंखला में विनिर्माण और कृषि क्षेत्रों में ‘डबल डिफ्लेशन’ पद्धति लागू की गई है, जबकि अन्य क्षेत्रों में एकल आकलन पद्धति अपनाई गई है। ‘डबल डिफ्लेशन’ पद्धति में उत्पादन और कच्चे माल की लागत दोनों को अलग-अलग महंगाई से समायोजित कर वास्तविक वृद्धि का अधिक सटीक आकलन किया जाता है।
घरेलू क्षेत्र के आकलन के लिए अब वार्षिक असंगठित क्षेत्र उद्यम सर्वेक्षण (ASUSE) और आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) जैसे नियमित सर्वेक्षणों के आंकड़ों का उपयोग किया जाएगा।








