शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को कहा कि भारत को अब केवल तकनीकी विकास ही नहीं बल्कि ज्ञान, विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में भी एक वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करना होगा। वे नीति आयोग की नई रिपोर्ट “प्रगति के मार्ग: भारत की नवाचार गाथा का विश्लेषण और अंतर्दृष्टि” जारी करने के मौके पर बोल रहे थे।
प्रधान ने कहा कि भारत के पास युवा प्रतिभा, संस्थागत क्षमता और अनुसंधान की ताकत है। इसे ऐसे नवाचार की दिशा में लगाना होगा, जो समावेशी, व्यापक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य हो।
कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का नवाचार केवल हाई-टेक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुसंधान, तकनीकी विकास और व्यावसायीकरण के जरिए आम लोगों की जरूरतों को भी पूरा कर रहा है। उन्होंने कहा कि समावेशी और संदर्भ-आधारित नवाचार भारत की सतत और समान विकास यात्रा की रीढ़ है।
नीति आयोग के सदस्य वी.के. सारस्वत ने इस रिपोर्ट को “साक्ष्य-आधारित दस्तावेज” बताते हुए कहा कि यह नीति-निर्माण को दिशा देगा और शिक्षा जगत-उद्योग-सरकार के बीच सहयोग को मजबूत करेगा।
अटल नवाचार मिशन के मिशन निदेशक दीपक बागला ने बताया कि यह मिशन स्टार्टअप संस्कृति, उद्यमशीलता और बड़े पैमाने पर नवाचार को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहा है।
रिपोर्ट में भारत के नवोन्मेष परिवेश की एक समग्र तस्वीर पेश की गई है—जिसमें राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पहल, उद्योग और जमीनी नवाचार, स्टार्टअप्स और वैश्विक नवाचार रैंकिंग में भारत की स्थिति शामिल है। साथ ही, इसमें मौजूदा चुनौतियों को चिह्नित करते हुए एक भविष्य का रोडमैप भी सुझाया गया है, जिसमें सफल मॉडलों का विस्तार, गहन तकनीकी नवाचार, ज्ञान सृजन और वैश्विक एकीकरण पर बल दिया गया है।










