नई दिल्ली। मार्च के महीने में देश के कई राज्यों में झमाझम बारिश हुई है। इस बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। मौसम एजेंसी स्काईमेट द्वारा जारी किए गए पूर्वानुमान की जानकारी थोड़ी निराश कर सकती है। साल 2026 में भारत में मानसून कमजोर रह सकता है।
यह पूर्वानुमान एक प्राइवेट मौसम एजेंसी स्काईमेट ने लगाया है। उन्होंने मंगलवार को कहा है कि 2026 में भारत में मानसून की बारिश सामान्य से कम रहने की उम्मीद है। इसकी वजह अल नीनो मौसम पैटर्न है, जिसकी वजह से जून-सितंबर की बारिश के मौसम के दूसरे हिस्से में बारिश होने की कम संभावना है। स्काईमेट की मानें तो चार महीने की इस अवधि के लिए मानसून की बारिश 868.6 मिमी के औसत के साथ 94% रहने की उम्मीद है।
इसके अलावा भारत का मौसम विज्ञान विभाग (IMD) अगले सप्ताह मानसून के लिए अपना पहला पूर्वानुमान जारी कर सकता है। जुलाई महीने में बारिश LPA के 95 फीसदी तक रहने का अनुमान है, यानी यह सामान्य से कम रह सकती है। जुलाई के लिए सामान्य और कम बारिश, दोनों की संभावना 40-40 फीसदी बताई गई है। इस महीने का LPA 280.5 मिमी है।
अगस्त में भी बारिश की स्थिति कमजोर हो सकती है। स्काईमेट का अनुमान है कि इस महीने बारिश LPA के 92 फीसदी तक ही रह सकती है। अगस्त में कम बारिश होने की संभावना करीब 60 फीसदी बताई गई है। इस महीने का LPA 254.9 मिमी है। वहीं सितंबर में भी राहत के संकेत नहीं हैं। देशभर में औसत बारिश LPA के 89 फीसदी रहने का अनुमान है, जो सामान्य से कम श्रेणी में आता है। सितंबर में कम बारिश होने की संभावना सबसे ज्यादा 79 फीसदी बताई गई है। इस महीने का LPA 167.9 मिमी है।
कुल मिलाकर स्काईमेट के शुरुआती अनुमान से साफ है कि 2026 के मानसून में जून को छोड़कर बाकी तीनों महीनों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है। इससे खेती और जल संसाधनों पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। दरअसल, जून और सितंबर का दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत में होने वाली सालाना बारिश का लगभग 70% हिस्सा है। यह देश के कृषि क्षेत्र के लिए बेहद ही महत्वपूर्ण है।









