नई दिल्ली। ईरान-इजरायल और अमेरिका तनाव के बीच भारत सरकार की सबसे बड़ी चिंता अब अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी और ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखना है। विदेश मंत्रालय ने साफ संकेत दिया है कि हालात जटिल हैं, लेकिन राहत और निकासी अभियान लगातार जारी है। विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया की स्थिति को पूरी दुनिया के लिए चुनौतीपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति न केवल देश के लिए, बल्कि पूरे वैश्विक समुदाय के लिए एक परीक्षा की घड़ी है। यह स्थिति भारत के लिए सिर्फ मानवीय संकट नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक चुनौती भी बनती जा रही है।
हॉर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) ग्लोबल ऑयल आपूर्ति की धुरी माना जाता है और इसका बंद होना सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करता है। जायसवाल ने एलएनजी (LNG) आपूर्ति पर असर को लेकर कहा, हालिया हमलों के कारण एलएनजी सप्लाई प्रभावित होने वाली है। हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से यह पहले ही प्रभावित हो चुकी है, लेकिन हम कई देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं। हम वहां सभी हितधारकों के संपर्क में हैं ताकि अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित कर सकें और हमारे कार्गो की बिना रोक-टोक के आवाजाही सुनिश्चित हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संकट लंबा खिंचता है तो भारत में गैस और तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके साथ ही औद्योगिक उत्पादन और बिजली क्षेत्र पर भी असर पड़ने की आशंका है। सरकार के लिए फिलहाल प्राथमिकता दो मोर्चों पर है- पहला, हर भारतीय नागरिक को सुरक्षित निकालना और दूसरा, ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान को कम करना।
9,000 से ज्यादा भारतीयों की चिंता : विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि ईरान में भारतीयों की सही संख्या का अनुमान लगाना आसान नहीं है। उन्होंने कहा, कुछ लोग खुद को दूतावास में रजिस्ट्रेशन नहीं कराते हैं इसलिए हमारा अनुमान 9,011 का था। उन छात्रों में से कई हमले शुरू होने से पहले लौट चुके थे।
हाल ही में लगभग 882 भारतीय नागरिक, जिनमें छात्र, कुछ कारोबारी और यहां से गए तीर्थयात्री शामिल हैं, अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते लौटने वाले हैं। 284 तीर्थयात्रियों में से 280 लौट चुके हैं। वे आर्मेनिया के रास्ते आए। 3-4 और एक-दो दिन में लौटेंगे। यह बयान स्पष्ट करता है कि भारत सरकार जमीन और हवाई दोनों रास्तों से नागरिकों को सुरक्षित निकालने की रणनीति पर काम कर रही है। खासकर मेडिकल शिक्षा के लिए ईरान गए भारतीय छात्रों, जिनमें बड़ी संख्या कश्मीर की छात्राओं की है, उनकी सुरक्षा और वापसी सबसे संवेदनशील मुद्दा बन गया है।










