सिंधुदुर्ग जिले में इन दिनों कलिंगड (तरबूज) का मौसम पूरे शबाब पर है। जिले के प्रमुख महामार्गों के किनारे जगह-जगह लगे स्टॉल्स पर कलिंगड की जमकर बिक्री होती नजर आ रही है। गर्मी के मौसम में लोगों की बढ़ती मांग के चलते किसानों को उम्मीद है कि इस साल उन्हें अच्छा मुनाफा मिलेगा। खास तौर पर कुडाळ तालुका के पाट गांव को जिले में कलिंगड उत्पादन का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
पाट गांव में उगाए जाने वाले मधुर और रसदार कलिंगडों की मांग केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि गोवा, रत्नागिरी और बेळगाव जैसे पड़ोसी जिलों और राज्यों तक पहुंच चुकी है। यहां उत्पादित कलिंगड स्वाद और गुणवत्ता के कारण ग्राहकों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। किसानों के अनुसार, इस समय खेतों में काढणी (कटाई) का काम जोरों पर है और रोजाना करीब 50 टन कलिंगड विभिन्न बाजारों में बिक्री के लिए भेजे जा रहे हैं।
हालांकि अच्छी पैदावार और बढ़ती मांग के बावजूद किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। किसानों ने आरोप लगाया है कि वन्यप्राणियों के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। रात के समय जंगली जानवर खेतों में घुसकर तैयार फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि वन्यप्राणियों से फसलों की सुरक्षा के लिए तत्काल उपाय किए जाएं। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है, जिससे मेहनतकश किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा।








