रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध उच्च गढ़वाल हिमालयी धामों केदारनाथ और यमुनोत्री ने बृहस्पतिवार को भैयादूज के पावन पर्व पर परंपरागत विधि-विधान के साथ शीतकालीन बंदी का समारोह संपन्न किया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी के बीच यह आयोजन अत्यंत भव्य और भक्तिमय रहा।
केदारनाथ में भावपूर्ण समापन
रुद्रप्रयाग जिले में स्थित ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग भगवान शिव के धाम, केदारनाथ के कपाट सुबह साढ़े आठ बजे बंद किए गए। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सूत्रों के अनुसार, कार्तिक शुक्ल सप्तमी और अनुराधा नक्षत्र में विशेष पूजा-अर्चना के पश्चात श्रद्धालुओं के लिए कपाट बंद किए गए।
इस मौके पर करीब दस हजार श्रद्धालु मौजूद थे, जिन्होंने ‘हर हर महादेव’, ‘जय बाबा केदार’ और ‘बम बम भोले’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना दिया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी श्रद्धालुओं के बीच उपस्थित रहे। प्रशासनिक अधिकारी, मंदिर समिति के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में तीर्थ पुरोहित भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
सर्दियों में अगले छह माह तक भगवान केदारनाथ की पूजा उनके शीतकालीन प्रवास स्थल उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में की जाएगी। इस अवसर पर मंदिर को पुष्पों से सजाया गया और सेना के बैंड की भक्ति धुनों के बीच जब उत्सव डोली बाहर निकली, तो समूचा माहौल भक्तिमय हो गया। डोली बृहस्पतिवार को रामपुर में रात्री प्रवास करेगी और 25 अक्टूबर को गुप्तकाशी से अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचेगी।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर देश—विदेश से आए श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दी और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच के अनुसार केदारपुरी का भव्य पुनर्निर्माण कार्य हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार शीतकालीन चारधाम यात्रा को भी प्रोत्साहित कर रही है और श्रद्धालुओं से अपील की कि वे शीतकालीन स्थलों में भी पूजा-अर्चना कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करें।
इस वर्ष के चारधाम धामों के दर्शन के आंकड़े भी उत्साहजनक रहे। केदारनाथ में कुल 17,68,795 तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए, जो पिछले वर्ष से करीब सवा लाख अधिक हैं। मानसून के दौरान यात्रा के बार-बार बाधित होने के बावजूद चारधाम और हेमकुंड साहिब के लिए लगभग 50 लाख श्रद्धालु आए।
यमुनोत्री धाम में भी हुआ समापन
गढ़वाल हिमालय के प्रमुख चार धामों में से एक यमुनोत्री का कपाट भी बृहस्पतिवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना के बाद विशाखा नक्षत्र में दोपहर 12:30 बजे बंद कर दिया गया। यमुनोत्री मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरूषोत्तम उनियाल ने बताया कि अब छह माह तक मां यमुना के दर्शन उनके शीतकालीन प्रवास स्थल खुशीमठ (खरसाली) गांव में होंगे।
इस प्रकार इस वर्ष की चारधाम यात्रा अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो चुके हैं। बदरीनाथ के कपाट 25 नवंबर को बंद होंगे, और इसके साथ ही इस वर्ष की चारधाम यात्रा का समापन होगा।
शीतकालीन बंदी का महत्व
सर्दियों में भारी बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के कारण चारधामों के कपाट हर वर्ष अक्टूबर – नवंबर में श्रद्धालुओं के लिए बंद किए जाते हैं और अगले साल अप्रैल – मई में पुनः खोल दिए जाते हैं। यह बंदी न केवल तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि मंदिरों के रख-रखाव और प्रबंधन के लिए भी आवश्यक है।
उत्तराखंड के धामों में शीतकालीन बंदी के इस वर्ष के आयोजन ने श्रद्धालुओं और अधिकारियों के लिए भक्तिभाव, परंपरा और संगठन का एक अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।








