बेंगलुरु। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सर्वोच्च न्यायालय में हुई हालिया घटना को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें एक वकील ने प्रधान न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति बी.आर. गवई की ओर जूता फेंकने की कोशिश की थी। खरगे ने कहा कि यह न केवल न्यायपालिका पर हमला है, बल्कि भारतीय संविधान और मौलिक अधिकारों की भावना पर भी आघात है।
खरगे ने बुधवार को कहा, “जो लोग मनुस्मृति और सनातन धर्म के नाम पर देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन कर रहे हैं, उन्हें सख्त दंड दिया जाना चाहिए। धर्म के नाम पर समाज में नफरत और तनाव फैलाने वालों को बख्शा नहीं जा सकता।”
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें दुख है कि इस घटना की देशभर में उतनी तीखी प्रतिक्रिया नहीं हुई, जितनी होनी चाहिए थी।
“यह अफसोसजनक है कि भारत के प्रधान न्यायाधीश पर अदालत में हमला करने जैसी घटना की देशव्यापी निंदा नहीं हुई। हालांकि कुछ प्रगतिशील राज्यों, अधिवक्ताओं और नेताओं ने इसे लेकर अपनी नाराजगी जताई है,” – खरगे ने कहा।
क्या है मामला
बीते सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान 71 वर्षीय अधिवक्ता राकेश किशोर ने CJI गवई की ओर जूता उछालने की कोशिश की। सतर्क सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए हमले को रोक दिया। जब राकेश किशोर को कोर्ट से बाहर ले जाया जा रहा था, तो उन्होंने नारे लगाए – “सनातन का अपमान नहीं सहेंगे।”
खरगे का बयान: संविधान सर्वोपरि
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि वह उन अधिवक्ताओं का सम्मान करते हैं, जिन्होंने इस घटना के विरोध में संविधान और न्यायिक गरिमा की रक्षा की बात कही। उन्होंने कहा,
“धर्म के नाम पर हिंसा और अराजकता फैलाने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। हमारा संविधान हर नागरिक को समान अधिकार देता है, उसे तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।”
उत्तर प्रदेश की घटना पर भी प्रतिक्रिया
खरगे ने उत्तर प्रदेश के रायबरेली में वाल्मीकि समुदाय के एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह घटना दर्शाती है कि “राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है।”
खरगे के इस बयान को न केवल राजनीतिक बयान के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि इसे संविधान और सामाजिक सौहार्द के संरक्षण की अपील के रूप में भी देखा जा रहा है।









