कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) से रोजगार, पुनर्वास और मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे लोगों ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) पर लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारी बताते हैं कि यह कार्रवाई शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान अचानक की गई।
छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि गेवरा खदान में आंदोलन कर रहे लोगों पर सीआईएसएफ ने अचानक बल प्रयोग किया। उन्होंने बताया कि इस घटना में किसान सभा के जिला सचिव दीपक साहू समेत कई पदाधिकारी और आंदोलनकारी गंभीर रूप से घायल हुए। झा ने आरोप लगाया कि सीआईएसएफ के एक अधिकारी ने प्रदर्शनकारियों के साथ गाली-गलौच की और फिर लाठीचार्ज शुरू कर दिया। घायल प्रदर्शनकारियों को जबरन थाने ले जाया गया।
घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में दीपका थाना पहुंचे और मारपीट और लाठीचार्ज का आदेश देने वाले सीआईएसएफ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। झा ने कहा, “एसईसीएल के इशारे पर की गई यह कार्रवाई निंदनीय है। भू-विस्थापितों की समस्याओं का समाधान किए बिना किसी भी स्थिति में खदान का विस्तार नहीं होने दिया जाएगा। यदि प्रबंधन जबरन विस्तार करने की कोशिश करेगा तो आंदोलन और उग्र होगा।” उन्होंने एसईसीएल से प्रभावित लोगों को नियमित रोजगार, उचित मुआवजा और पुनर्वास की सुविधा देने की मांग भी की।
एसईसीएल के जनसंपर्क अधिकारी सनीश चंद्रा ने बताया कि आज सुबह लगभग 10 से 11 बजे नरइबोध-भठौरा गांव की ओर से कुछ प्रदर्शनकारी खदान क्षेत्र में पहुंचे और कोयला उत्पादन व निष्कासन गतिविधियों को बाधित करने का प्रयास किया। चंद्रा ने कहा कि यह क्षेत्र निषिद्ध है और भारी मशीनें चल रही हैं, इसलिए सीआईएसएफ के दल ने प्रदर्शनकारियों को रोककर वापस भेजने की कोशिश की।
दीपका थाना के प्रभारी प्रेमचंद साहू ने कहा कि खदान के भीतर सीआईएसएफ के अधिकार और कार्रवाई की सीमा जांच का विषय है। प्रशासन और खदान प्रबंधन इस मामले की जांच कर स्थिति स्पष्ट करेंगे।
कोरबा जिले में यह घटना स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ाने वाली साबित हुई है, और भू-विस्थापित समुदाय तथा एसईसीएल प्रबंधन के बीच वार्ता की संभावना पर सभी की निगाहें हैं।










