नई दिल्ली। ईरान में तेजी से बिगड़ते हालात के बीच भारत सरकार ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए अब तक का सबसे सख्त अलर्ट जारी किया है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि ईरान में मौजूद भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस बीच विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक ब्रीफिंग में ईरान के अलावा चाबहार पोर्ट, भारत-जापान संबंध, सलमान खान की फिल्म विवाद, म्यांमार चुनाव और ब्रिक्स (BRICS) नौसैनिक अभ्यास जैसे अहम मुद्दों पर भी जानकारी दी गई।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक ब्रीफिंग में बताया कि ईरान में वर्तमान में लगभग ९००० भारतीय नागरिक रह रहे हैं। इनमें से अधिकतर छात्र हैं जो वहां शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। सुरक्षा हालातों को देखते हुए मंत्रालय ने भारतीयों को तुरंत ईरान छोड़ने और वहां की यात्रा न करने की सख्त सलाह दी है।
इसके अलावा भारत और जापान के बीच रणनीतिक संबंधों को लेकर भी अहम जानकारी साझा की गई है। चाबहार पोर्ट पर अमेरिका द्वारा दी गई छूट और सलमान खान की आगामी फिल्म पर चल रहे विवाद पर भी विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी। म्यांमार चुनाव पर भी भारत ने अपना पक्ष रखते हुए समावेशी और निष्पक्ष चुनाव की मांग की है। दक्षिण अफ्रीका में होने वाले ब्रिक्स नौसैनिक अभ्यास में भी भारत के शामिल न होने की पुष्टि की गई है।
ईरान के हालात हर बीतते घंटे के साथ बिगड़ते जा रहे हैं। रणधीर जायसवाल ने बताया कि वहां रहने वाले ९००० भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है। मंत्रालय ने पिछले कुछ दिनों में कई सख्त एडवाइजरी जारी की हैं। भारतीयों को सलाह दी गई है कि वे जल्द से जल्द भारत लौटने का प्रबंध करें। वर्तमान स्थिति को देखते हुए किसी भी भारतीय को ईरान जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। दूतावास लगातार वहां मौजूद छात्रों और अन्य नागरिकों के संपर्क में बना हुआ है। सरकार वहां की हर हलचल पर पैनी नजर रख रही है ताकि कोई अनहोनी न हो।
भारत के रणनीतिक मिशन चाबहार पोर्ट को लेकर एक बहुत अच्छी खबर सामने आई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने इस प्रोजेक्ट के लिए भारत को बिना शर्त प्रतिबंधों से छूट दे दी है। यह छूट २६ अप्रैल २०२६ तक प्रभावी रहेगी। रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की है कि भारत इस फ्रेमवर्क के भीतर काम करने के लिए अमेरिका से लगातार बात कर रहा है। यह छूट भारत को मध्य एशिया के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने में मदद करेगी। ईरान के आंतरिक हालातों के बावजूद इस बंदरगाह का संचालन भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अमेरिका का यह कदम भारत की कूटनीतिक जीत माना जा रहा है।












